नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (आईवीपीए) ने सोमवार को नेपाल से शुल्क-मुक्त रिफाइंड खाद्य तेल के आयात में ‘अभूतपूर्व वृद्धि’ पर चिंता जताते हुए सरकार से इस पर कदम उठाने की मांग की।
नेपाल से यह शुल्क-मुक्त आयात दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) समझौते के तहत किया जा रहा है।
उद्योग संगठन के मुताबिक, नेपाल से खाद्य तेल का आयात दो वर्षों में 17 गुना से अधिक बढ़कर 2025 में 8.04 लाख टन से अधिक हो गया जबकि 2023 में यह 47,295 टन था।
आईवीपीए ने कहा कि इस रफ्तार से जल्द ही सालाना आयात 10 लाख टन तक पहुंच सकता है, जिससे नेपाल, भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो जाएगा।
उद्योग निकाय ने कहा, ‘‘यह रुझान भारत के खाद्य तेल व्यापार में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव दर्शाता है। इस पर नीतिगत स्तर पर ध्यान देना जरूरी है ताकि व्यापार, शुल्क और घरेलू मूल्य संवर्धन के लक्ष्यों में संतुलन बना रहे।’’
आईवीपीए के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा, “भारत क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का समर्थक रहा है और साफ्टा समझौते के उद्देश्यों को लेकर पूर्ण प्रतिबद्ध है, लेकिन शुल्क-मुक्त आयात का यह स्तर घरेलू रिफाइनिंग उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और किसानों के हितों की रक्षा के लिए नीतिगत समीक्षा की मांग करता है।”
संघ ने आगाह किया कि नेपाल से आयात इतनी तेजी से बढ़ने से घरेलू रिफाइनिंग क्षमता के उपयोग, भविष्य के निवेश और सोयाबीन व सरसों जैसे देश में उगाए जाने वाले तिलहनों की मांग पर असर पड़ सकता है। इससे सरकार को सालाना 2,000-2,500 करोड़ रुपये के सीमा शुल्क राजस्व का नुकसान हो सकता है।
देसाई ने कहा, “हमारा उद्देश्य नेपाल के साथ वैध द्विपक्षीय व्यापार को बाधित करना या भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को कमजोर करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि तरजीही शुल्क लाभ केवल उन्हीं उत्पादों को मिले जो वास्तव में ‘मूल स्थान के नियम’ मानकों पर खरे उतरते हैं।”
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर है। हालांकि, सरकार देश में रिफाइनिंग को बढ़ावा देकर मूल्य संवर्धन, निवेश और रोजगार को घरेलू स्तर पर बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
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