प्रयोगशाला से खेत तक प्रौद्योगिकी पहुंचने से उत्तर प्रदेश की कृषि वृद्धि 18 प्रतिशत परः मुख्यमंत्री

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प्रयोगशाला से खेत तक प्रौद्योगिकी पहुंचने से उत्तर प्रदेश की कृषि वृद्धि 18 प्रतिशत परः मुख्यमंत्री

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  • Publish Date - April 24, 2026 / 07:08 PM IST,
    Updated On - April 24, 2026 / 07:08 PM IST

लखनऊ, 24 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि राज्य की कृषि वृद्धि दर लगभग आठ प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है, जिसका श्रेय वैज्ञानिकों एवं किसानों के बीच बेहतर समन्वय और प्रयोगशाला से खेत तक प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण को जाता है।

मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ”सरकार की ‘लैब टू लैंड’ पहल के तहत विकसित तकनीकों और शोध को प्रभावी तरीके से खेतों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे उत्पादकता में सुधार हुआ है।”

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उद्यान मंत्री दिनेश सिंह और नौ राज्यों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब 2017 में उनकी सरकार बनी थी, तब कई कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) निष्क्रिय स्थिति में थे, लेकिन अब वे नवाचार और किसानों तक प्रौद्योगिकी पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से राज्य के नौ कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुरूप क्षेत्र विशेष की खेती को बढ़ावा दिया गया है। वैज्ञानिकों और किसानों के बीच नियमित संवाद, खेतों में प्रदर्शन और निरंतर मार्गदर्शन से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में धान की पैदावार 50-60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 100 क्विंटल तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि बेहतर सिंचाई, बिजली आपूर्ति और संपर्क सुविधाओं के कारण कई जिलों में किसान साल में एक या दो फसल के बजाय तीन फसलें उगा रहे हैं, जिससे आय में वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि गेहूं का उत्पादन लगभग 425 लाख टन, चावल का 211 लाख टन और आलू का 245 लाख टन तक पहुंच गया है। तिलहन उत्पादन करीब 48 लाख टन है, जबकि सब्जियों, दलहन और मोटे अनाज की उपज में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

योगी आदित्यनाथ ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे मिट्टी की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी बल दिया।

उन्होंने ‘अल नीनो’ के प्रभाव का जिक्र करते हुए आम जैसी बागवानी फसलों पर पड़ने वाले इसके असर को लेकर आगाह किया और लागत घटाने, गुणवत्ता वाले बीजों के उपयोग तथा फसल विविधीकरण पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि राज्य में 85-86 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचित है और किसानों को 10-12 घंटे बिजली आपूर्ति मिल रही है, जिससे उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं।

मुख्यमंत्री ने आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र की स्वीकृति का स्वागत करते हुए कहा कि इससे मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को आकर्षित कर किसानों को लाभ होगा।

उन्होंने पिछली सरकारों के कामकाज पर तंज कसते हुए कहा कि पहले अक्सर नीतियां बनती थीं, लेकिन एक औपचारिक आयोजन बनकर सभी कार्यक्रम संपन्न हो जाते थे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को श्रेय देते हुए कहा, ‘आज परिणाम सबके सामने देखने को मिल रहे हैं। थोड़ा प्रयास कर लें तो हमारे अन्नदाता को बहुत जानकारी है, सिर्फ हमें शासन की योजना के बारे में उनको अवगत कराना है। वो अपने आप ही बेहतर परिणाम देने को तैयार हैं।”

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कृषि की वृद्धि दर आठ प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न कृषि जलवायु क्षेत्र होने के कारण नीतियां भी उसी अनुरूप तय की जानी चाहिए। यदि अलग-अलग क्षेत्र में इस प्रकार की गोष्ठियां आयोजित की जाएं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार द्वारा बीज उपलब्ध कराने, जानकारी देने और खरीद केंद्र स्थापित करने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। किसानों को अब अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है।

भाषा आनन्द पाण्डेय

पाण्डेय