अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के ‘काफी करीब’: गोयल

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अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के ‘काफी करीब’: गोयल

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  • Publish Date - June 25, 2026 / 07:25 PM IST,
    Updated On - June 25, 2026 / 07:25 PM IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, 25 जून (भाषा) वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता ‘बहुत करीब’ है, लेकिन यह तब तक लागू नहीं हो सकता जब तक भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में शुल्क का लाभ न मिले।

उन्होंने यहां ‘इंडिया ग्लोबल फोरम (आईजीएफ) यूके-इंडिया वीक इवेंट’ में कहा, ‘‘जिस दिन ऐसा होगा, समझौता पक्का हो जाएगा।’’

गोयल भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर यहां आए हैं।

मंत्री ने इस सप्ताह नयी दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर के साथ भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण पर दो दिन तक बातचीत की।

हालांकि, वाणिज्य मंत्रालय के एक बयान से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि 24 जुलाई को 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क खत्म होने से पहले सभी मतभेद सुलझा लिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते का मुख्य मकसद बाजार तक पहुंच के मामले में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में फायदा दिलाना है।

गोयल ने कहा, ‘‘और जब तक प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले लाभ पाने की रूपरेखा तय नहीं हो जाती, हम अमेरिका के साथ समझौता लागू नहीं कर सकते। मुझे नहीं लगता कि मैं इससे ज्यादा साफ तौर पर कुछ कह सकता हूं…।’’

जब बीटीए के पहले चरण की रूपरेखा तय की गयी थी, तो भारत को आसियान देशों (इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाइलैंड, फिलिपीन, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमा, कंबोडिया), श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लाभ था।

रूपरेखा के तहत, अमेरिका ने भारतीय सामान पर 18 प्रतिशत शुल्क की घोषणा की थी। उस समय, भारत के प्रतिस्पर्धी देशों पर शुल्क 19 से 20 प्रतिशत के बीच था। लेकिन अब, सभी देशों पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगता है।

मंत्री ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते की रूपरेखा इस साल छह फरवरी को घोषित की गई थी और दोनों टीमें तब से समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘समझौते में हमेशा थोड़ा-बहुत लेन-देन होता है और हम समझौते के बहुत करीब हैं।’’

गोयल ने बताया कि जब भारत ने अमेरिका के साथ समझौता पक्का किया था, तब अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत शुल्क लागू थे।

इस समझौते के तहत भारत पर लगने वाले 50 प्रतिशत शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर बातचीत हुई थी।

अभी जो बातचीत हो रही है, वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अस्थायी 10 प्रतिशत शुल्क व्यवस्था के माहौल में हो रही है, जो एक महीने में खत्म होने वाला है।

उन्होंने कहा, ‘‘पूरा समझौता उस प्रतिस्पर्धी बढ़त पर केंद्रित था जो हमें अपने पड़ोसियों और प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले 18 प्रतिशत शुल्क के साथ मिला था। हम अपने सभी पड़ोसी देशों और सिंगापुर को छोड़कर सभी आसियान देशों से कम शुल्क दे रहे थे, इसीलिए यह समझौता हमारे लिए आकर्षक था।’’

गोयल ने कहा, ‘‘अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रंप के व्यापक शुल्क को रद्द करने और अब 24 जुलाई को अतिरिक्त अस्थायी शुल्क के खत्म होने के साथ, जाहिर है कि जिस समझौते पर हम पहले ही सहमत हो चुके हैं, उसे लागू करने के लिए हमारे पास कोई ठोस वजह होनी चाहिए।’’

मंत्री ने कहा कि अब इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि भारत को उन देशों (वियतनाम, थाइलैंड, फिलिपीन, मलेशिया, इंडोनेशिया, चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका) के मुकाबले शुल्क में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिले, जो विकास के उसी चरण में हैं या जिनका लागत ढांचा भारत जैसा ही है।

भाषा रमण अजय

अजय