लखनऊ, 25 जून (भाषा) ‘अल नीनो’ संकट के चलते इस साल कम बारिश होने की सम्भावना के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के हर जिले में कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी और खेती करने के ढंग को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग वैकल्पिक योजनाएं बनायी जाएंगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। बैठक में कृषि और ग्रामीण विकास की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई।
राज्य सरकार द्वारा यहां जारी एक बयान के मुताबिक बैठक में चौहान ने कहा कि इस वर्ष ‘अल नीनो’ संकट के चलते अब तक कम बारिश हुई है और आगे भी इसमें गिरावट की संभावना है। बयान के अनुसार इसको देखते हुए बैठक में तय किया गया है कि कम पानी का इस्तेमाल करके और कम समय में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए जिले–जिले के हिसाब से वैकल्पिक योजनाएं बनायी जाएंगी।
उन्होंने कहा कि अलग–अलग जिलों की जल उपलब्धता, मिट्टी और खेती करने के ढंग को देखते हुए वैकल्पिक फसलों की सूची बनाई जाएगी और उन्हें अपनाने के लिये किसानों को प्रेरित किया जाएगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों, राज्य कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के जरिये किसानों तक समय पर सलाह, बीज और तकनीकी मार्गदर्शन पहुंचाने की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है।
अल नीनो प्रशांत महासागर में उत्पन्न होने वाली जलवायु सम्बन्धी एक कुदरती और मौसमी स्थिति है। इसके प्रभावी होने पर मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा हो जाता है, जिससे पूरी दुनिया का मौसम चक्र अव्यवस्थित हो जाता है और इसका सीधा असर वर्षा चक्र पर होता है।
बयान के मुताबिक बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने रबी विपणन वर्ष 2026–27 के लिए गेहूं, चना, मसूर जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद अवधि 24 जून से बढ़ाकर आठ जुलाई करने की मंज़ूरी का पत्र मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को सौंपा। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के नए चरण के तहत उत्तर प्रदेश के लिए छह लाख 18 हजार 482 पक्के मकानों की स्वीकृति का अनुमोदन पत्र भी मुख्यमंत्री को सौंपा।
चौहान ने कहा कि भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे अहम है, इसलिए यहां की खेती के लिए एक ‘वैज्ञानिक और दीर्घकालिक रोडमैप’ तैयार करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और घटता भूजल स्तर खेती के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं, लिहाजा उत्तर प्रदेश की कृषि के लिए तैयार किया जा रहा वैज्ञानिक रोडमैप फसल पैटर्न, सिंचाई, जल संरक्षण, बीज, तकनीक और विपणन तक सभी पहलुओं को जोड़कर बनाया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि इसका प्रारूप आज मुख्यमंत्री आदित्यनाथ, प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और उनकी टीम के साथ विस्तार से चर्चा के लिए रखा गया जिसे आगे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर अंतिम रूप देंगी।
बयान के अनुसार बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान चौहान ने बताया कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में घरों का सर्वे पूरा हो चुका है और उन गरीब लोगों की पहचान कर ली गई है जो कच्चे मकान में रहते हैं और पक्के घर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब अगला चरण इन पात्र परिवारों को प्राथमिकता के साथ पीएम आवास–ग्रामीण के अंतर्गत पक्का मकान देने का है, जिससे प्रधानमंत्री मोदी के ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ संकल्प को जमीन पर गति मिलेगी।
भाषा सलीम
अमित
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