माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई से बस्तर में भय का अंत, विकास का नया सवेरा हो रहा: मुर्मू

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माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई से बस्तर में भय का अंत, विकास का नया सवेरा हो रहा: मुर्मू

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  • Publish Date - February 7, 2026 / 05:30 PM IST,
    Updated On - February 7, 2026 / 05:30 PM IST

जगदलपुर (छत्तीसगढ़), सात फरवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि माओवादियों के खिलाफ सरकार की निर्णायक कार्रवाई ने बस्तर क्षेत्र में भय व अविश्वास के माहौल का अंत कर दिया है और विकास का एक नया सवेरा हो रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में तीन दिवसीय संभागीय स्तर के बस्तर पंडुम उत्सव का उद्घाटन करने के बाद हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल हुए लोगों से अपील कि वे संविधान और लोकतंत्र पर भरोसा रखें तथा शांति के मार्ग से विचलित करने की कोशिश करने वालों के बहकावे में नहीं आएं।

उन्होंने कहा, ‘‘बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं ने हमेशा लोगों को आकर्षित किया है लेकिन दुर्भाग्य से यह क्षेत्र वर्षों तक माओवाद के खतरे से पीड़ित रहा।’’

मुर्मू ने कहा कि नक्सलवाद ने युवाओं, आदिवासियों और दलितों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि माओवादी गतिविधियों से जुड़े लोग अब हिंसा छोड़ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में शांति लौट रही है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत सरकार द्वारा माओवादियों के खिलाफ की गई निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप भय और अविश्वास का माहौल खत्म हो गया।’’

मुर्मू ने कहा कि उन्हें सूचित किया गया है कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि मुख्यधारा में लौटने वाले लोग सामान्य और गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।

उन्होंने कहा कि कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं और छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नियाद नेल्लानार’ पहल ग्रामीणों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुर्मू ने कहा कि गांवों में बिजली, सड़कें और पीने का पानी उपलब्ध हो रहा है जबकि वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं।

उन्होंने इसे ‘‘बेहद उत्साहजनक तस्वीर’’ करार दिया।

राष्ट्रपति ने कहा, “सरकार के प्रयासों और जनता के सहयोग से बस्तर में विकास का एक नया सवेरा उदय हो रहा है।”

उन्होंने लोगों से व्यवस्था पर भरोसा रखने और कड़ी मेहनत एवं समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया तथा लोकतंत्र को शक्ति का स्रोत बताया।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल हुए लोगों से मैं अपील करती हूं कि वे संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखें तथा गुमराह करने वालों के बहकावे में नहीं आएं।’’

उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से पिछड़े गांवों को विकास से जोड़ा जा रहा है।

राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की नींव के रूप में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आदिवासी बच्चों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आदिवासी क्षेत्रों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय शुरू किए गए हैं।

मुर्मू ने संविधान के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है कि ओडिशा के एक छोटे से गांव की बेटी आज राष्ट्रपति के रूप में आपको संबोधित कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘आपमें और भी अधिक साहस एवं शक्ति है। सरकार आपके प्रति समर्पित है।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार समाज के गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस बात पर जोर दिया कि इन वंचित तबकों का उत्थान सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ को पिछड़ा हुआ माना जाता था लेकिन ऐसा नहीं है। इसकी भव्यता देखिए। छत्तीसगढ़ वैभव और समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण राज्य है। यह छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोगों के कारण है। उनकी संस्कृति अमूल्य है।”

मुर्मू ने कहा, “यह प्राचीन है, फिर भी बेहद खूबसूरत है। जिन लोगों ने इस समावेशिता और समानता को नहीं देखा है, उन्हें पांडुम उत्सव देखना चाहिए और इससे सीखना चाहिए।”

उन्होंने बस्तर क्षेत्र की अपार पर्यटन क्षमता पर प्रकाश डाला और इसका श्रेय उत्साही लोगों, प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, झरनों व गुफाओं को दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि बेहतर सुविधाएं अधिक पर्यटकों को आकर्षित करेंगी।

उन्होंने विश्व स्तर पर ‘होमस्टे’ की लोकप्रियता को देखते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में उचित कदम उठाए हैं।

मुर्मू ने छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में दशकों तक नि:स्वार्थ सेवा करने के लिए पद्म पुरस्कार 2026 के वास्ते चयनित डॉ. बुध्री ताती, डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को बधाई दी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर कभी नक्सलवाद और भय के लिए जाना जाता था लेकिन स्थिति तेजी से बदल रही है।

उन्होंने कहा, “जिन इलाकों में कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, अब वहां विद्यालयों की घंटियों की आवाज सुनाई दे रही है।”

साय ने माओवाद को खत्म करने के लिए मोदी सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च, 2026 के लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और अन्य लोग उपस्थित थे।

भाषा जितेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल