Ambikapur News: झारखंड के हाथियों से गुलजार हो रहे सरगुजा के जंगल.. 33 हाथियों ने फिर किया सरहद पार, वन अमला अलर्ट

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देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन इसके प्रबंधन की किस तरह की व्यवस्था करता है, ताकि हाथी और इंसान दोनों अपने-अपने इलाकों में सुरक्षित रह सके।

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  • Publish Date - January 4, 2024 / 03:16 PM IST,
    Updated On - January 4, 2024 / 03:16 PM IST

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सरगुजा: छत्तीसगढ़ में हाथियो की मौजूदगी तो अब साल भर बनी रहती है मगर अब झारखंड के हाथियो को भी छग की हरियाली और यहां मौजूद पर्याप्त भोजन उन्हें आकर्षित कर रही हैं। यही कारण है कि दूसरे राज्य झारखंड से आकर हाथी यहां न सिर्फ अपना कुनबा बढ़ा रहे है बल्कि यही के स्थानीय निवासी हो जा रहे है। ऐसे में प्रदेश में जहां हाथियो की संख्या लगातार बढ़ रही है तो वही दूसरी तरफ इनके प्रबंधन को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ती जा रही है।

छत्तीसगढ़ के ज्यादातर इलाकों में हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं और छत्तीसगढ़ का सरगुजा संभाग हाथियों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। यही कारण है कि सरगुजा संभाग के कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर, अंबिकापुर ,जशपुर इलाकों में हाथियों की मौजूदगी साल भर बनी रहती है। मगर छत्तीसगढ़ और सरगुजा संभाग का वातावरण न सिर्फ छत्तीसगढ़ के हाथियों को पसंद आ रहा है बल्कि दूसरे राज्य से हाथी इस इलाके में दाखिल हो रहे हैं।

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वर्तमान में करीब 33 हाथियों का दल झारखंड से सरगुजा पहुंचा है जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हाथी विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि छत्तीसगढ़ के जंगल और यहां मौजूद हाथियों के लिए भोजन उन्हें अपनी और आकर्षित कर रहा है और यही कारण है कि लगातार हाथी दूसरे राज्यों से छत्तीसगढ़ में अपनी मौजूदगी तो दिखा ही रहे हैं साथ ही साथ अपने कुनबे में भी वृद्धि यहां के स्थानीय बनते जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में करीब 300 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है मगर अब दूसरे राज्यों से पहुंचने वाले हाथियों के कारण इनकी संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। दिलचस्प बात यह की अलग-अलग हाथियों के दल में उनकी संख्या भी बढ़ रही है और शावकों जन्म देकर हाथी अपने संख्या में भी वृद्धि कर रहे हैं। ऐसे में हाथी विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि हाथियों की बढ़ती संख्या के कारण इनके मैनेजमेंट को लेकर वन विभाग और प्रशासन की मुश्किलें जहां बढ़ सकती हैं तो वहीं हाथी मानव द्वंद्व की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

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इधर जिला प्रशासन हाथियों से सचेत रहने की बात लोगों से तो कर ही रहा है साथ ही साथ यह भी बात कह रहा है कि हाथियों के इलाके में लोग दखल ना करें। जिससे किसी तरह की अपनी स्थिति पैदा हो सके। कलेक्टर सरगुजा बहरहाल छत्तीसगढ़ अपने वन संपदा को लेकर तो जाना ही जाता है साथ ही साथ यहां वर्ष भर अलग-अलग खेती भी होती है। ऐसे में हाथियों के आकर्षण का केंद्र छत्तीसगढ़ बनता जा रहा है जो वन विभाग के लिए जहां एक तरफ खुशी तो वहीं वन विभाग की चिंता बढ़ने वाला भी संकेत हैं। जिस तरह से हाथियों की मौजूदगी शहरी क्षेत्र हो रही है और हाथी गांव के इर्द-गिर्द देखी जा रही है उसे साफ है कि आने वाले दिनों में हाथियों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए मुसीबत बन सकती है। ऐसे में देखना होगा कि वन विभाग और प्रशासन इसके प्रबंधन की किस तरह की व्यवस्था करता है, ताकि हाथी और इंसान दोनों अपने-अपने इलाकों में सुरक्षित रह सके।

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