Reported By: Arun Soni
,Balrampur Water Crisis News / Image SOURCE : screengrab
बलरामपुर: Balrampur Water Crisis News : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में हर साल गर्मी के साथ जल संकट गहराता जा रहा है। कई गांव ऐसे हैं जहां बोरवेल की कई सौ फीट खुदाई के बाद भी पानी नहीं निकलता। गिरते भू-जल स्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन अब इस संकट से निपटने के लिए जिले में एक अनोखी मुहिम शुरू हुई है। “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत हर खेत में गड्ढे खोदकर बारिश के पानी को संजोने की तैयारी की जा रही है। खास बात यह है कि इस अभियान में सिर्फ ग्रामीण ही नहीं, बल्कि कलेक्टर, सांसद और अधिकारी भी खुद फावड़ा उठाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
बलरामपुर में पानी की हर बूंद की कीमत अब लोगों को अच्छी तरह समझ आने लगी है। लगातार गिरते भू-जल स्तर ने कई गांवों में पेयजल का संकट खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि बोरवेल की खुदाई के बाद भी पानी नहीं मिलता और गर्मी के दिनों में नए बोर खनन पर प्रतिबंध तक लगाना पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए जिले में “मोर गांव मोर पानी” अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत किसानों के खेतों में गड्ढे खोदे जा रहे हैं ताकि बरसात का पानी वहीं रुके, जमीन में समाए और भू-जल स्तर को बढ़ाने में मदद मिले। गांव-गांव में लोग श्रमदान कर इस मुहिम को जन आंदोलन का रूप दे रहे हैं।
अभियान की सबसे खास बात यह है कि प्रशासन भी सिर्फ निर्देश देने तक सीमित नहीं है। कलेक्टर, सांसद और अधिकारी खुद फावड़ा चलाकर लोगों को जल संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि आज पानी बचाया गया तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल पानी की कमी से खेती और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि बारिश के पानी का संरक्षण होने से आने वाले वर्षों में गांवों का जलस्तर सुधरेगा और पेयजल संकट से राहत मिलेगी।
जिला प्रशासन का लक्ष्य सिर्फ गड्ढे खोदना नहीं, बल्कि जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाना है। यदि यह पहल सफल रही तो बलरामपुर के सूखते जल स्रोतों में फिर से नई जान आ सकती है और जिले के हजारों परिवारों को स्थायी राहत मिल सकती है। पानी की हर बूंद बचाने की यह पहल केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि आने वाले कल को सुरक्षित करने की कोशिश है। अगर बरसात का पानी जमीन में उतरा, तो शायद बलरामपुर के सूखते बोरवेल फिर से पानी देने लगें और जल संकट की तस्वीर बदल जाए।