धर्मांतरण, आरक्षण और रण! भानुप्रतापपुर चुनाव की सरगर्मी तेज, किसके पक्ष में आएगा 2023 के लिटमस टेस्ट का रिजल्ट

धर्मांतरण, आरक्षण और रण! भानुप्रतापपुर चुनाव की सरगर्मी तेजः Bhanupratappur elections intensified in Chhattisgarh

धर्मांतरण, आरक्षण और रण! भानुप्रतापपुर चुनाव की सरगर्मी तेज, किसके पक्ष में आएगा 2023 के लिटमस टेस्ट का रिजल्ट
Modified Date: December 3, 2022 / 03:36 pm IST
Published Date: November 7, 2022 11:27 pm IST

सौरभ सिंह परिहार/रायपुरः Bhanupratappur elections intensified आदिवासी बहुल प्रदेश में आदिवासियों का बढ़ा हुआ आरक्षण प्रतिशत रद्द होना  सबसे बड़ा मुद्दा है। अब जबकि प्रदेश में कांकेर जिले की भानुप्रतापपुर विधानसभा सीट पर 5 दिसंबर को उपचुनाव होना है तो प्रमुख तौर पर इस मुद्दे पर राजनीति होना भी लाजिमी है। आदिवासी आरक्षण के मसले पर दोनों पार्टियां एक-दूसरे को पूरी तरह से नाकाम और जिम्मेदार बता रही हैं। बड़ा सवाल ये कि इस पर आदिवासी वर्ग क्या सोचता है, किसे जिम्मेदार मानता है और किसके आगे उम्मीद रखता है, इसका जवाब भी भानुप्रतापुर उपचुनाव के नतीजे से ही मिलेगा। ऐसे में मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष कैसे और किन तर्कों के साथ अपनी बात जनता से कह रहा है।

Read More :  Epfo update: नौकरीपेशा में हैं और कट रहा है आपका PF, तो ऑनलाइन कर लें ये सेटिंग, पैसे से जुड़ी हर टेंशन हो जाएगी दूर 

Bhanupratappur elections intensified भानुप्रतापपुर उपचुनाव की तारीख तय होने के साथ ही दोनों पार्टियों ने एक दूसरे को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। बैनर पंपलेट से लेकर नेताओँ के बयान ये भी तय हो गया है कि उपचुनाव में आदिवासी आरक्षण सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा होगा..बीजेपी पहले दिन से आदिवासी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस पर हमलावर है। बीजेपी नेता आरोप लगा रहे हैं कि आदिवासियों का आरक्षण रद्द इसी सरकार ने किया है।

Read More :  समंदर किनारे रेड बिकिनी में एक्ट्रेस ने दिए हॉट पोज, होश उड़ा देगा अनुपमा की ‘काव्या’ का ये ग्लैमरस अवतार

भानुप्रतापपुर उपचुनाव की बाजी जीतने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है। 12 नवंबर को अजय जामवाल, शिवप्रकाश और प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में यहां बीजेपी चुनावी रणनीति तैयार करेगी। ये भी कहा जा रहा है कि आरक्षण के अलावा धर्मांतरण भी बीजेपी का मुख्य मुद्दा होगा. दूसरी ओर कांग्रेस का दावा है कि भानुप्रतापपुर उपचुनाव से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। जनता ये तय कर देगी कि बीजेपी आदिवासी विरोधी है।

Read More : बंटवारे पर बयान..निशाने पर मुसलमान! ‘निरस्त हो विभाजन या मुसलमान जाए पाकिस्तान’…भारत-पाकिस्तान विभाग पर शंकराचार्य का बयान 

भानुप्रतापपुर विधानसभा में 70 फीसदी मतदाता आदिवासी हैं और इसके नतीजे बताएंगे कि 2023 के विधानसभा चुनाव में धर्मांतरण और आदिवासी आरक्षण खारिज होने के लिए खुद आदिवासी वर्ग किसे जिम्मेदार मानता है। आदिवासी वोटर्स किसके प्रयासों से इत्तेफाक रखते हैं। यानि इसे आदिवासी वर्ग का मूड जानने का सीधा टेस्ट कहें तो गलत ना होगा।

 


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।