Bilaspur High Court Latest News: बिना सहमति नहीं किया जा सकता नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट.. बिलासपुर हाईकोर्ट ने दी फरियादियों को राहत, हत्या से जुड़ा है पूरा मामला..

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Bilaspur High Court on Narco or polygraph tests: बिलासपुर हाईकोर्ट ने सहमति बिना नार्को, पॉलीग्राफ और BEAP टेस्ट पर रोक लगाते हुए पुलिस को कड़े निर्देश दिए।

Bilaspur High Court on Narco or polygraph tests || Image- IBC24 News File

HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने नार्को टेस्ट पर लगाई रोक।
  • बिना सहमति वैज्ञानिक जांच नहीं करा सकेगी पुलिस।
  • 18 दिन पूछताछ पर पुलिस कार्रवाई चुनौती बनी।

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना नार्को एनालिसिस, पॉलीग्राफ या अन्य वैज्ञानिक जांच कराने के लिए पुलिस मजबूर नहीं कर सकती। (Bilaspur High Court on Narco or polygraph tests) मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की और रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की।

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रायगढ़ जिले के हत्या से जुड़ा है मामला

मामला रायगढ़ जिले के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के एक प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) और 238(A) के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान संदेह के आधार पर ग्राम बेहरापाली निवासी किसान लक्ष्मीनारायण पटेल और ग्राम महापल्ली निवासी अर्धना भगत को पूछताछ के लिए बुलाया गया।

दोनों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद है। इसके बावजूद पुलिस ने जांच के नाम पर लगातार 18 दिनों तक उन्हें थाने बुलाया, घंटों बैठाकर रखा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। (Bilaspur High Court on Narco or polygraph tests) उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत उन्हें कोई वैधानिक नोटिस जारी नहीं किया गया। आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाकर सुपुर्दनामा पर हस्ताक्षर कराए और बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए।

बिना न्यायिक अनुमति और सहमति कार्यवाही

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि पुलिस ने उनकी सहमति और न्यायिक अनुमति के बिना 20 जून को नार्को एनालिसिस, पॉलीग्राफ और ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन प्रोफाइल (BEAP) टेस्ट के लिए नोटिस जारी किया तथा उन्हें 22 और 23 जून को रायपुर में उपस्थित होने के लिए कहा गया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध इस प्रकार की वैज्ञानिक जांच से नहीं गुजराया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि जांच एजेंसी नार्को एनालिसिस, पॉलीग्राफ, बीईएपी या किसी अन्य समान वैज्ञानिक परीक्षण का प्रस्ताव रखती है, तो वह केवल संबंधित व्यक्ति की स्वतंत्र, स्वैच्छिक और पूरी जानकारी के साथ दी गई सहमति के आधार पर ही किया जा सकता है।

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हाईकोर्ट का पुलिस को निर्देश

खंडपीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को किसी भी प्रकार के वैज्ञानिक परीक्षण के लिए बाध्य न किया जाए। (Bilaspur High Court on Narco or polygraph tests) साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान संविधान और कानून द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का पूरी तरह पालन किया जाना अनिवार्य है।

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हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया है?

उत्तर: बिना सहमति किसी भी व्यक्ति का नार्को, पॉलीग्राफ या BEAP टेस्ट नहीं कराया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?

उत्तर: लगातार पूछताछ, प्रताड़ना, अवैध हिरासत और जबरन वैज्ञानिक जांच कराने का आरोप लगाया।

मामला किस अपराध की जांच से जुड़ा है?

उत्तर: रायगढ़ में दर्ज हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के मामले की पुलिस जांच से जुड़ा है।