Bilaspur Municipal Corporation Dispute : शहर सरकार में ‘कुर्सी कांड’! महापौर के खिलाफ अपने ही पार्षदों ने खोला मोर्चा, बीजेपी में मचा घमासान

बिलासपुर नगर निगम में महापौर और MIC सदस्यों के बीच बढ़ती खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। बैठने की जगह न मिलने और कार्यशैली को लेकर उठे सवालों के बीच सत्ता पक्ष की अंदरूनी कलह पर विपक्ष भी हमलावर हो गया है।

Bilaspur Municipal Corporation Dispute : शहर सरकार में ‘कुर्सी कांड’! महापौर के खिलाफ अपने ही पार्षदों ने खोला मोर्चा, बीजेपी में मचा घमासान

Bilaspur Municipal Corporation Dispute / Image Source : FILE

Modified Date: June 10, 2026 / 10:11 pm IST
Published Date: June 10, 2026 10:08 pm IST
HIGHLIGHTS
  • MIC सदस्यों ने बैठने की व्यवस्था नहीं होने पर जताई नाराजगी
  • महापौर की कार्यशैली को लेकर सत्ता पक्ष में असंतोष
  • विपक्ष ने शहर के विकास कार्य प्रभावित होने का लगाया आरोप

बिलासपुर : Bilaspur Municipal Corporation Dispute :  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नगर निगम में शहर सरकार के सत्ता पक्ष यानी बीजेपी में अंदरूनी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। विपक्ष के साथ-साथ अब सत्ता पक्ष के ही पार्षद और एमआईसी सदस्य महापौर के सामने हैं। वजह है एमआईसी सदस्यों के लिए निगम कार्यालय में बैठने की अब तक उचित जगह नहीं मिलना और कामकाज में महापौर की मनमानी। यानी यह लड़ाई अब कुर्सी की बन गई है। इस कलह से आम जनता और शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

आम जनता और शहर का कामकाज प्रभावित

बिलासपुर नगर निगम में सत्ता पक्ष के लोगों में आपसी कलह कोई नई बात नहीं है। कभी महापौर और सभापति आमने-सामने होते हैं तो कभी महापौर अपने ही पार्षदों से घिरी नजर आती हैं। इस बार लड़ाई महापौर और एमआईसी सदस्यों के बीच है।दरअसल, हाल ही में एमआईसी की बैठक हुई। जानकारी के अनुसार, बैठक में सभी एमआईसी सदस्यों ने महापौर की मनमानी का विरोध किया। Bilaspur Municipal Corporation Dispute वजह यह थी कि महापौर ने पार्षदों को ही निष्क्रिय बता दिया था। इधर, एमआईसी सदस्यों को सरकार बनने के डेढ़ साल बाद तक निगम कार्यालय में बैठने की जगह तक नहीं मिल सकी है। इस वजह से भी उनका गुस्सा अब साफ तौर पर सामने आने लगा है।विपक्ष का आरोप है कि इसकी वजह से आम जनता और शहर का कामकाज प्रभावित हो रहा है।

महापौर ने भरी सभा में सीनियर नेता को कहा नासमझ

इधर, सरकार की आपसी कलह की बातें अब सार्वजनिक होने लगी हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि महापौर ने अपने सीनियर नेता, वर्तमान सभापति और पूर्व महापौर विनोद सोनी को भरी सभा में नासमझ कह दिया था।खुद विनोद सोनी भी यह मानते हैं कि महापौर का व्यवहार सबके लिए अलग-अलग है। Bilaspur Mayor Vs MIC Members उन्हें पार्षदों और एमआईसी सदस्यों की बात को तवज्जो देनी चाहिए। एमआईसी सदस्य भी मानते हैं कि बैठक में विवाद की स्थिति बनी थी, हालांकि वे इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।

सरकार की अंदरूनी खींचतान अब कमरों से बाहर

वहीं, पूरे विवाद पर महापौर का कहना है कि बातचीत और संवाद एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। कोई विवाद या गुटबाजी नहीं है। घर में भी बर्तन बजते हैं, इसका मतलब लड़ाई नहीं होता।उनका कहना है कि विपक्ष इस सामान्य बातचीत को विवाद का रूप देकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।कुल मिलाकर, शहर सरकार की अंदरूनी खींचतान अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजनिक हो चुकी है। सत्ता पक्ष इसे सामान्य संवाद कह रहा है, लेकिन विपक्ष इसे महापौर की कार्यशैली और समन्वय की कमी का नतीजा बता रहा है।बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी के भीतर की यह “कुर्सी की लड़ाई” जल्द खत्म होगी या फिर इसका असर शहर के विकास कार्यों और निगम की कार्यप्रणाली पर लगातार पड़ता रहेगा।

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लेखक के बारे में

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