शह मात The Big Debate: अधूरे निर्माण पर रार..बयान, दावा, तकरार, पपक्ष और विपक्ष में तेज हुई जुबानी जंग, विकास के मुद्दे पर सियासी लड़ाई से किसे मिलेगा फायदा?

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Chhattisgarh Politics News: बस्तर-सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तमाम दावों के बावजूद कई विकास कार्य अटके या अधूरे पड़े हैं।

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  • Publish Date - June 9, 2026 / 11:27 PM IST,
    Updated On - June 9, 2026 / 11:29 PM IST

Chhattisgarh Politics News/Image Credit: IBC24.in

HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ में अधूरे या फिर अटके पड़े विकास कार्यों को लेकर राजनीति शुरू हो गई है।
  • अधूरे विकास कार्यों को लेकर पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
  • कांग्रेस और भाजपा के नेता एक दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

Chhattisgarh Politics News: रायपुर: बस्तरसरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तमाम दावों के बावजूद कई विकास कार्य अटके या अधूरे पड़े हैं जिन्हें लेकर पक्ष-विपक्ष में ब्लेम-गेम चरम पर है। बीते दिनों अपने दौरे के दौरान अंबिकापुर में मेडिकल कॉलेज अस्पताल की अधूरी बिल्डिंग के लिए, प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार और जय-वीरू यानि भूपेश-टीएस की लड़ाई को जिम्मेदार बताया। दावा किया कि इसके लिए उनकी सरकार ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मंजूर की है। जिसपर जवाब दिया खुद पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा ढाई साल बाद भी अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई, कब तक पिछली सरकार की ओट लेंगे, वित्त मंत्री स्वयं अब जिम्मेदारी लें।

इधर, बस्तर दौरे के दौरान जगदलपुर पहुंचे प्रदेश के PWD मंत्री अरुण साव अधूरे ब्रिज और सड़क निर्माण कार्यों को लेकर प्रशासनिक अमले पर जमकर भड़के। (Chhattisgarh Politics News) घटना का वीडियो सामने आते ही कांग्रेस ने X-पोस्ट कर तंज कसा, डिप्टी सीएम खुद अपनी ही सरकार की पोल खोल रहे हैं। वैसे,पिछले ढाई साल से जनता भी आपकी सरकार से नाराज है। कांग्रेस के पोस्ट पर पलटवार किया खुद डिप्टी CM अरूण साव ने कहा कि नाराज तो जनता कांग्रेस से है सुबूत 2023 से लेकर अब तक हर चुनाव के नतीजे हैं।

Chhattisgarh Politics News: वैसे पर्सनल आरोप-प्रत्यारोप के बजाय यहां लड़ाई जनता के मुद्दों पर, अधूरे-अटके प्रोजेक्टस पर है जो की बेहतर है, (Chhattisgarh Politics News) लेकिन सवाल ये है कि एक-दूसरे को कोसकर कब तक काम चलेगा। जरूरी तो ये है कि इस बहस का कोई सार्थक परिणाम निकले जनता को काम मिले ना कि बयानी जंग।

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