Reported By: Nitesh Gupta
,Chhattisgarh Pregnant Woman Delivery in Field: बारिश के बीच महिला ने खेत में ही दिया बच्चे को जन्म, नहीं पहुंच पाई अस्पताल, छत्तीसगढ़ के इस जिले का है मामला, Video देख दहल उठेगा दिल /image: IBC24
सूरजपुर। Chhattisgarh Pregnant Woman Delivery in Field: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर धुरिया से एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है। सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के कारण बंद हुए रास्ते ने एक गर्भवती आदिवासी महिला को ऐसी पीड़ा दी, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. घर तक जाने वाला रास्ता बंद होने की वजह से न तो वाहन पहुंच सका और न ही गर्भवती महिला समय पर अस्पताल पहुंच पाई. आखिरकार प्रसव पीड़ा बढ़ने पर उसे खेत में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. जिसका वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है.
परिजनों के अनुसार गर्भवती शिवकुमारी को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर रमकोला स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए निजी वाहन बुक किया गया. क्षेत्र में समय पर एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो सकी. लेकिन घर की ओर आने वाला मुख्य रास्ता सरकारी जमीन पर कब्जे के कारण बंद होने से वाहन करीब 500 मीटर दूर ही खड़ा करना पड़ा. परिजन महिला को पैदल पगडंडी से लेकर निकल रहे थे, तभी रास्ते में प्रसव पीड़ा तेज हो गई और खेत में ही महिलाओं की मदद से सुरक्षित प्रसव कराना पड़ा. इस दौरान पूरी घटना का वीडियो किसी ने बना लिया जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. फ़िलहाल माँ और नवजात को रामकोला स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां दोनों का इलाज जारी है और दोनों स्वस्थ हैं.
Chhattisgarh Pregnant Woman Delivery in Field ग्रामीणों का आरोप है कि बलरामपुर जिले के निवासी लल्लू प्रजापति ने धुरिया में शासकीय भूमि पर कब्जा कर खेती कर ली है. इतना ही नहीं, झटका मशीन लगाकर पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है, जिससे करीब आधा दर्जन परिवारों का वर्षों पुराना आने-जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. इसी बंद रास्ते की वजह से गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और खेत में प्रसव जैसी नौबत आ गई. इस कब्जे को हटाने और रास्ता खुलवाने की मांग वे कई बार प्रतापपुर एसडीएम और जिला कलेक्टर से कर चुके हैं. लिखित शिकायतें भी दी गईं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई.
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते शासकीय जमीन से कब्जा हटाकर रास्ता खोल दिया जाता, तो आज यह घटना नहीं होती और गर्भवती महिला को खेत में बच्चे को जन्म (Chhattisgarh Pregnant Woman Delivery in Field) देने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता. फिलहाल मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सरकारी जमीन पर कब्जे के कारण आधा दर्जन परिवारों के घर जाने का रास्ता ही बंद हो जाए और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न हो, तो उसकी कीमत आखिर आम लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर क्यों चुकानी पड़े.
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