अदालत ने ‘अश्लील सीडी’ मामले में बघेल के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई

अदालत ने 'अश्लील सीडी' मामले में बघेल के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई

अदालत ने ‘अश्लील सीडी’ मामले में बघेल के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई
Modified Date: July 30, 2026 / 09:20 pm IST
Published Date: July 30, 2026 9:20 pm IST

बिलासपुर, 30 जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कथित अश्लील वीडियो के प्रसार मामले में पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के खिलाफ रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी।

यह मामला कथित अश्लील वीडियो के प्रसार से जुड़ा है, जिसमें भाजपा नेता एवं एक पूर्व मंत्री के होने का दावा किया गया है।

न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल ने यह अंतरिम आदेश भूपेश बघेल की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें उन्होंने 24 जनवरी 2026 को विशेष सीबीआई न्यायाधीश, रायपुर द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी है।

सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 24 जनवरी को मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को पलट दिया था, जिसमें बघेल को 2017 के मामले में बरी कर दिया गया था।

विशेष अदालत ने निचली अदालत को उनके खिलाफ आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।

उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश के अनुसार, बघेल की ओर से पेश अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने दलील दी कि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई), रायपुर ने अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य सामग्री का परीक्षण करने के बाद 4 मार्च 2025 को याचिकाकर्ता को इस मामले में आरोपों से मुक्त किया था।

उन्होंने बताया कि इसके बाद विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) ने इस आदेश के खिलाफ आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसे विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने 24 जनवरी 2026 को स्वीकार कर लिया था।

परगनिहा ने दलील दी कि पुनरीक्षण अदालत ने अपने अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर कार्य किया और उसका आदेश कानून की दृष्टि से मान्य नहीं है।

उन्होंने बिलासपुर उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि उनके मुवक्किल की याचिका के लंबित रहने के दौरान निचली अदालत में जारी आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए।

सीबीआई के वकील ने इस याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि पुनरीक्षण न्यायालय ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद बरी संबंधी आदेश को सही रूप से निरस्त किया है और उच्च न्यायालय को इस निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

केंद्रीय एजेंसी ने बघेल की याचिका की पोषणीयता पर भी सवाल उठाया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि रायपुर के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) के समक्ष लंबित मामले में बघेल (65) के खिलाफ आगे की कार्यवाही अगले आदेश तक स्थगित रहेगी।

इस मामले को सितंबर के पहले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

यह विवाद अक्टूबर 2017 का है, जब तत्कालीन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी एक कथित सेक्स सीडी सामने आई थी, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने 2017 में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री मूणत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता प्रकाश बजाज द्वारा दायर अलग-अलग शिकायतों के आधार पर दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कीं।

बाद में छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा नीत सरकार ने इन मामलों को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया। सीबीआई ने इस मामले में एक आरोपपत्र और एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया।

पहला मामला 26 अक्टूबर, 2017 को रायपुर के पंदरी थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ इस आरोप पर दर्ज किया गया था कि शिकायतकर्ता (बजाज) को फोन पर एक अज्ञात व्यक्ति ने कहा था कि मेरे पास उसके ‘आका’ का एक अश्लील वीडियो है और धमकी दी थी कि अगर उसकी फिरौती की मांग पूरी नहीं की गई तो वह इसे प्रसारित कर देगा।

जांच के बाद, एक पुलिस टीम को दिल्ली भेजा गया और वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा को 27 अक्टूबर 2017 को गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया। उस समय पुलिस ने दावा किया था कि उसने 500 सीडी और पेन ड्राइव समेत अन्य सामान बरामद किए हैं।

बघेल के करीबी विनोद वर्मा ने तब दावा किया था कि उनके पास छत्तीसगढ़ के एक मंत्री की सेक्स सीडी है।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश


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