जगदलपुरः IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026 बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में आज आजादी पर्व के पावन अवसर पर IBC24 की ओर से ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026′ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम विजय शर्मा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने बस्तर संभाग की उन 8 बेटियों को स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप प्रदान किया, जिन्होंने बोर्ड परीक्षा में अपने जिले की प्रावीण्य सूची में अपना स्थान बनाया है। कार्यक्रम में पहुंचने पर IBC24 के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश गोयल ने उनका स्वागत किया।
IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026 इस दौरान चैनल के एडिटर इन चीफ रवि कांत मित्तल ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा से संवाद किया। एडिटर इन चीफ मित्तल ने उनसे बस्तर के विकास के साथ अन्य विषयों को लेकर सवाल किया, जिसका डिप्टी सीएम विजय शर्मा बड़े बेबाकी से जवाब दिया। बस्तर में तिरंगा यात्रा को लेकर उन्होंने कहा कि बस्तर में तिरंगा फहराने पर हत्याएं हुई है। अभी भी वहां के लोगों में यह डर बना हुआ है कि कही फिर हत्या जैसी वारदातें ना हो जाए। इसलिए लोगों में भय खत्म करने के लिए यह तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। उन्होंने एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब वे कांकेर जिले के एक गांव में गए थे तो वहां ग्रामीणों ने कहा कि नक्सली उन्हें तिरंगा फहराने नहीं दे रहे थे तो एक तरकीब निकली। पहले उन्होंने तिरंगा फहराया फिर उसे छाते से ढक दिया। उन्होंने कहा कि यह साहसिक कार्य करने वाले लोग वहां पर हैं, जिनके हृदय में यह बात थी।
दिमागी नक्सलवाद के सवाल पर डिप्टी सीएम शर्मा ने ट्विन टावर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों ने प्लेन हाईजैक किया और ट्विन टावर में टकरा दिया। उसमें लगभग 2300 लोग मारे गए थे। पायलट, इंजीनियर्स, डॉक्टर्स थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की थी। उनके घर परिवार में पैसे रुपए की संसाधनों की कोई कमी नहीं थी। खुद भी मर गए और लोगों को भी मार डाला। भय उस वाद से है जो फितूर बनकर माथे पर चढ़ जाता है और फिर आदमी से कुछ भी करवाता है जो यहां हो रहा था बस्तर में। और जो जिसकी चिंता अभी भी बनी हुई है। बस्तर में पुनर्वासित माओवादियों का मानसिक, समाजिक और स्किल का पुर्नवास हो रहा है। हमारे यहां दिमागी नक्सली की समस्या नहीं आने वाली है।
बस्तर के विकास और पर्यटन पर उन्होंने कहा कि बस्तर के नौजवानों पर दोहरी जिम्मेदारी है कि उनको फ्यूचर के साथ-साथ पिछड़े आदिवासियों की भी चिंता करनी है। सरकार ने बहुत अच्छी योजना बनाई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि हम हमारे बस्तर को भारतवर्ष का सबसे उन्नत आदिवासी संभाग बनाएंगे। इस पर भी काम हो रहा है। बस्तर को बस्तर की धुन पर आगे बढ़ाना, बस्तर को बस्तर की पिच पर आगे बढ़ाना, बस्तर के रिदम पर आगे बढ़ाना है। बस्तर को वाशिंगटन या रायपुर नहीं बनाना है। बस्तर बहुत संपन्न है। बस्तर की संस्कृति बहुत संपन्न है। बस्तर के लोग बड़े अच्छे हैं। बड़े मन लगाकर काम करने वाले और सहकार भाव वाले हैं। बस्तर की धुन पर बस्तर आगे बढ़े इसकी जिम्मेदारी निस्संदेह सरकार की है। पर्यटन को लेकर उन्होंने कहा कि बस्तर में कुछ अतिरिक्त बनाने की आवश्यकता नहीं है। भगवान ने इस धरती को बहुत कुछ दिया है। जब भगवान ने ही इतना अच्छा सुंदर बना दिया है तो लोग ऐसे ही आएंगे। अभी बहुत हड़बड़ी और बहुत प्रयास करने की दिशा में मैं सोचता हूं कि थोड़ा रुकना चाहिए। बस्तर के लघु वन उपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और स्टोरेज भंडारण और विपणन इन चार बिंदुओं पर पहले काम होना चाहिए और पहले काम इस बार सरकारों की तरफ से तो हो ही रहा है, परंतु जन जागरण आवश्यक विषय होता है। समाज बड़ी बात होती है। जब समाज उठकर खड़ा होता है तो परिणाम निकलते हैं। कुछ पैमानों को फिक्स करने की आवश्यकता है। डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि बस्तर में खेल के साथ-साथ संस्कृति पर काम करने की आवश्यकता है।
बस्तर रेजीमेंट के सवाल पर उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने बस्तरिया बटालियन बना लिया और उसमें रिक्रूटमेंट भी हुए। उसके लोग यहां पर काम कर रहे हैं। वो बस्तर के लोकल है। जैसे हमारा बस्तर फाइटर है। कालांतर में तो इसका नाम बदल देंगे। अब फाइटर की जरूरत नहीं है। हमको बस्तर में अब पीस की जरूरत है। हम उस दिशा में जाएंगे। हम बस्तर फाइटर में जो नियुक्तियां करेंगे, अभी आने वाले समय में वो बस्तर के लोकल जिलों के आधार पर ही करेंगे। ऐसे ही एक आग्रह रक्षा मंत्री जी से किया हुआ था कि बस्तर के नौजवानों में गजब का स्ट्रेंथ है। हम वो दो दिन बिना पानी के पहाड़ों पर चढ़ जाएंगे। इतना स्ट्रेंथ है। तो इस स्ट्रेंथ का उपयोग हम और कर सकते हैं क्या? तो मैंने उनको आग्रह पत्र लिखा था।