दुर्ग: Mock Drill in Chhattisgarh: आज पूरे देश में डिफेंस सिविल मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है, जिसके लिए छत्तीसगढ़ से केवल दुर्ग जिले का चयन किया गया है। सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए दुर्ग जिला आज देश भर की निगाहों में है। जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की टीमें सुबह से ही हाई अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
Mock Drill in Chhattisgarh: शाम 4 बजे से भिलाई और दुर्ग के पांच चिह्नित स्थानों पर मॉक ड्रिल की शुरुआत होगी। इन स्थानों में –
1. भिलाई स्टील प्लांट
2. पावर हाउस बाजार
3. सूर्य ट्रेजर मॉल
4. इंदिरा मार्केट
5. पुलगांव चौक
इन सभी स्थानों पर 5 से 7 मिनट तक सायरन बजाकर युद्ध जैसे हालात का अभ्यास किया जाएगा। इसके अलावा दो अन्य स्थानों पर भी सायरन इंस्टॉल किए जा रहे हैं, जिनका उपयोग ज़रूरत के अनुसार किया जाएगा।
Mock Drill in Chhattisgarh: ड्रिल के सफल आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस भी हर संवेदनशील स्थान पर तैनात रहेगी। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की विशेष टीमें मौके पर मौजूद रहेंगी और रेस्क्यू प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगी।
Mock Drill in Chhattisgarh: मॉक ड्रिल को लेकर जिला प्रशासन और बीएसपी द्वारा एक जागरूकता वीडियो भी जारी किया गया है जिसमें आम जनता को बताया गया है कि सायरन बजने पर कैसे सतर्क रहना है, क्या करना है और किस तरह संयम बनाए रखना है।जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सायरन बजने पर न डरें और न ही घबराएं। यह एक अभ्यास है, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में आम जनता और सुरक्षा बलों की तैयारियों को मज़बूती दी जा सके।
"डिफेंस सिविल मॉक ड्रिल" क्या होती है और इसका उद्देश्य क्या है?
डिफेंस सिविल मॉक ड्रिल एक पूर्व नियोजित अभ्यास है जिसका उद्देश्य युद्ध जैसी या आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता की प्रतिक्रिया और तैयारी को परखना होता है।
दुर्ग जिले को "डिफेंस सिविल मॉक ड्रिल" के लिए क्यों चुना गया?
दुर्ग को छत्तीसगढ़ से अकेले ऐसे जिले के रूप में चुना गया है जो औद्योगिक, शहरी और संवेदनशील क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यहां डिफेंस सिविल मॉक ड्रिल की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता की बेहतर जांच हो सकती है।
"डिफेंस सिविल मॉक ड्रिल" के दौरान जनता को क्या करना चाहिए?
प्रशासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार सायरन बजते ही लोगों को सतर्क रहना चाहिए, किसी भी अफवाह से बचना चाहिए और निर्देशों का पालन करते हुए संयम बनाए रखना चाहिए।
क्या "डिफेंस सिविल मॉक ड्रिल" के दौरान सायरन बजने का मतलब खतरा है?
नहीं, यह केवल एक अभ्यास है। सायरन युद्ध या आपात स्थिति का संकेत देने के लिए बजाया जाता है ताकि वास्तविक स्थिति में लोग सही प्रतिक्रिया दे सकें।
"डिफेंस सिविल मॉक ड्रिल" में कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल होती हैं?
इस ड्रिल में जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीएसपी (BSP) और अन्य स्थानीय व राज्य स्तरीय सुरक्षा एजेंसियां शामिल होती हैं।