रायपुर, 22 सितंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनी है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री साय, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए।
उन्होंने इस दौरान माताओं-बहनों से मुलाकात कर उन्हें तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं।
साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है।
उन्होंने कहा, ‘‘माताओं-बहनों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना का अवसर है।
साय ने कहा, “ भारतीय सनातन संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सम्मान दिया गया है। एक मां परिवार की पहली शिक्षक और संस्कारों की आधारशिला होती है। माताओं-बहनों के परिश्रम, त्याग और आशीर्वाद से परिवार मजबूत होता है तथा मजबूत परिवार से सशक्त समाज और समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बराबर का सहभागी मानकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत 68 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने एक हजार रुपये की राशि सीधे अंतरित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “ योजना से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। महिलाएं इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, बचत और छोटे-छोटे स्वरोजगार के लिए कर रही हैं।”
उन्होंने कहा कि यह आर्थिक सहायता महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रही है।
साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं बल्कि महिलाओं को स्थायी आजीविका, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
भाषा संजीव जितेंद्र
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