नई दिल्लीः Padma Awards 2026: केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से पहले 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस बार देश के 45 हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कार दिया जाएगा। इसमें छत्तीसगढ से तीन भी शामिल है। छत्तीसगढ़ से इस बार रामचन्द्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले का संयुक्त रूप से यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। वहीं बुधरी ताती को भी यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। ये तीनों लोग दंतेवाड़ा जिले से ताल्लूक रखते हैं और समाज सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करते हैं।
बता दें कि नक्सलगढ़ इलाके में डॉ रामचंद्र गोडबोले (61) पिछले 37 सालों से ग्रामीणों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि अशिक्षित व आर्थिक रूप से कमजोर अबूझमाड़ के ग्रामीणों को सही समय पर सही इलाज मिल सके। डॉ रामचंद्र गोडबोले महाराष्ट्र को छोड़ छत्तीसगढ़ के बारसूर में बस गए। और यहां नक्सलगढ़ अबूझमाड़ के ग्रामीणों को हेल्थ सुविधा देने की ठानी। दंतेवाड़ा के अलावा बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर के अंदरुनी गांवों तक पहुंच हेल्थ कैम्प लगाकर सैकड़ों ग्रामीणों का निःशुल्क इलाज किया। ये ऐसे इलाके हैं जहां स्वास्थ्य टीम का पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता है।
Padma Awards 2026: डॉ गोडबोले महाराष्ट्र, मेघालय, गुजरात के ट्राइबल क्षेत्रों में अपनी सेवा दे चुके हैं। साल 1990 में छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में आए। यहां करीब 13 साल सेवा देने के बाद पारिवारिक कारणों से वापस महाराष्ट्र गए, लेकिन वहां भी आदिवासियों की सेवा करनी नहीं छोड़ी। साल 2010 को एक बार फिर बारसूर आए और फिर यहां नक्सलगढ़ इलाकों में फिर से लोगों की सेवा शुरू कर दी।
अंदरूनी गांवों के ग्रामीणों में हेल्थ को लेकर जागरूकता हो और समय पर उन्हें इलाज मिले इसलिए नक्सलगढ़ अबूझमाड़ इलाकों में डॉ रामचंद्र गोडबोले (61) डटे हुए हैं। 37 सालों से ट्राइबल क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। 5 सालों में इन्होंने 8500 ग्रामीणों के स्वास्थ्य की निशुल्क जांच कर उन्हें स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करा चुके हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल से लेकर बड़े शहरों के डॉक्टरों को बुलाकर ग्रामीणों का इलाज भी करवाएं हैं।
डॉ गोडबोले की पत्नी सुनीता गोडबोले भी दंतेवाड़ा में CWC की सदस्य हैं। डॉ गोडबोले बताते हैं कि वनवासी क्षेत्रों के लोगों की सेवा में सबसे बड़ा साथ पत्नी का है। उन्होंने शादी से पहले यही शर्त रखी थी कि हमें वनवासी क्षेत्रों में लोगों की सेवा करनी है। दोनों इसी काम में जुट गए है।