Raipur Bulldozer Action | Phot Credit: IBC24
रायपुर: वैसे ये बहस नई नहीं है कि किसी घृणित अपराध में लिप्त आरोपी, ऐसा आरोपी जिसकी करतूत उजागर हो चुकी है लेकिन मामला न्यायलीन प्रक्रिया में हो। उनके अवैध ठिकानों जैसे मकान-दुकान पर प्रशासन का बुलडोजर एक्शन (Raipur Bulldozer Action) कितना सही है? इसकी क्या जरूरत है? क्या इससे इंसाफ मिलेगा। जवाब में अक्सर तर्क दिया जाता है। ये पीड़ित की पीड़ा और लोगों के आक्रोश का जवाब होता है। रायपुर में भी मामला 9 साल की बच्ची से रेप जैसे घिनौने क्राइम से जुड़ा है। जिसके 68 साल के आरोपी के यहां एक्शन हुआ है। सत्तापक्ष इसे जायज और सही ठहरा रहा है तो विपक्ष इसपर सवाल उठा रहा है कितना सही है ये एक्शन?
Raipur News बुलडोजर एक्शन की ये ताजा तस्वीर राजधानी रायपुर की हैं जहा एक 9 साल की बच्ची के रेप के आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी की दुकान पर रायपुर नगर निगम का बुलडोजर एक्शन हुआ। निगम ने अंसारी के अवैध अतिक्रमण कर बनाई दुकान को जमींदोज़ कर दिया। महापौर मीनल चौबे ने कहा जिसने मासूम बच्ची का बचपन और मासूमियत छीनी उसके प्रति लोगों का भारी आक्रोश था। चौबे ने चेताते हुए कहा कि कुत्सित मानसिकता वाले जान लें, संभल जाएं। उनके साथ कुछ भी हो सकता है।
निगम के इस बुजडोजर एक्शन को गृह मंत्री विजय शर्मा पूरी तरह कानून के दायरे में और उचित बता रहे हैं, लेकिन ये कार्रवाई विपक्ष को रास नहीं आई। PCC चीफ दीपक बैज ने पूछा कि किसी अपराधी के घर बुलडोज़र चलाने से अपराध रुकेगा क्या? जवाब में मंत्री लखन लाल देवांगन के कहा ऐसे लोगों की निजी निर्माण भी तोड़ना चाहिए।
ये सच है कि बच्चियों से रेप की घटना पर लोगों का आक्रोश चरम पर है लोग चाहते हैं कि ऐसे अपराधियों को सरेआम सजा दी जाए, लेकिन विपक्ष बुलडोजर एक्शन को इसका हल नहीं मानता। अब ऐसे में सवाल ये कि ऐसे लोगों के लिए त्वरित ऐसी कौन सी सजा है? क्या विपक्ष के पास इसका बेहतर और मान्य हल है?