Raipur Sahitya Utsav 2026 : ‘साहित्य- उपनिषद से AI तक’ विषय पर हुई विचारोत्तेजक परिचर्चा, साहित्यकारों को आयी डॉ. विनोद कुमार शुक्ल की याद

Ads

Raipur Sahitya Utsav 2026: एआई के पहलू पर बातचीत की रायपुर ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर प्रोफेसर ओपी व्यास ने और साहित्य के उपनिषद से लेकर मौजूदा दौर तक के मानवीय भावों वाले सफर पर विचार रखे।

  • Reported By: Rajesh Raj

    ,
  •  
  • Publish Date - January 24, 2026 / 10:51 PM IST,
    Updated On - January 24, 2026 / 10:51 PM IST

Raipur Sahitya Utsav 2026: image source: cgdpr

HIGHLIGHTS
  • सबसे आशंकित करने वाले मुद्दे पर विचारोत्तेजक परिचर्चा
  • जितना बेहतर विषय रहा, उतना ही बेहतर और विद्वान पैनलिस्ट
  • उपनिषद से लेकर मौजूदा दौर तक के मानवीय भावों वाले सफर पर रखे विचार

Raipur News: नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तागंन में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का दूसरा दिन,  (Raipur Sahitya Utsav 2026 second day) मौजूदा दौर की सबसे चर्चित, सबसे आशंकित करने वाले मुद्दे पर एक विचारोत्तेजक परिचर्चा की गवाह बनी। विषय था- साहित्य- उपनिषद से एआई तक। जितना बेहतर विषय रहा, उतना ही बेहतर और विद्वान पैनलिस्ट भी रहे। एआई के पहलू पर बातचीत की रायपुर ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर प्रोफेसर ओपी व्यास ने और साहित्य के उपनिषद से लेकर मौजूदा दौर तक के मानवीय भावों वाले सफर पर विचार रखे।

दिल्ली से आए विद्वान लेखक डॉ. गोपाल कमल ने. वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल केतकर और छत्तीसगढ़ के साहित्यकार संजीव तिवारी भी इस परिचर्चा में शामिल हुए। तो चर्चा हुई, क्या साहित्य का सृजन मानव जाति की सबसे गंभीर चुनौती से जूझने जा रहा है, (Raipur Sahitya Utsav 2026 second day) क्योंकि आप एआई को आदेश देंगे, वह कहानी लिखेगा, उपन्यास लिखेगा, गीत लिखेगा, कविता लिखेगा, चित्र बनाएगा, फिल्म बनाएगा.. फिर साहित्य का सृजन में मानव क्या करेगा..? इसका जवाब डॉ. गोपल कमल ने बहुत ही रोचक अंदाज में दिया।

साहित्य के सामने चुनौती बनकर खड़ा एआई

सवाल यह कि क्या सच में साहित्य के सामने एआई चुनौती बन कर खड़ा हुआ है, क्योंकि यह साहित्य में मानव भाव और संवेदना को खत्म करने की चुनौती दे रहा है। (Raipur Sahitya Utsav 2026 second day news) इस पर ट्रिपल आईटी के डायरेक्टर डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने कहा- नहीं। एआई चुनौती नहीं, यह सहायक है।

परिचर्चा में शामिल संजीव तिवारी ने भी कहा कि उपनिषद और एआई दोनों एक जैसे हैं। (Raipur Sahitya Utsav 2026 second day) दोनों ज्ञान का खजाना हैं, दोनों प्रश्न उत्तर शैली में जवाब देते हैं। वहीं, प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि हमारे ऋषि सूचना की नहीं, ज्ञान की बात करते थे, लेकिन एआई सिर्फ सूचना देता है, ज्ञान नहीं।

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में याद किए गए डॉ. विनोद कुमार शुक्ल

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में, प्रदेश की माटी में पले बढ़े देश के शीर्षस्थ साहित्यकार में शुमार डॉ. विनोद कुमार शुक्ल को शिद्दत से याद किया गया। महज कुछ महीने पहले ही वो इस दुनिया को विदा कह गए, लिहाजा उनकी स्मृति में, उनके सम्मान में, रायपुर साहित्य उत्सव के मुख्य मंडप का नाम भी विनोद कुमार शुक्ल मंडप रखा गया। यहीं से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साहित्य उत्सव का शुभारंभ किया और इसी साहित्य उत्सव के पहले दिन, एक विशेष परिचर्चा के जरिए विनोद कुमार शुक्ल, उनकी कृति उनकी रचना को ना सिर्फ याद किया गया, बल्कि परिचर्चा में शामिल वक्ताओं ने विनोद कुमार शुक्ल के साथ बिताए निजी पलों को भी साझा किया।

परिचर्चा की शुरुआत भारतीय प्रशासनिक सेवा से रिटायर हुए अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने की। (Raipur Sahitya Utsav 2026 second day news) उन्होने कहा कि डॉ. शुक्ल ने किसी विचारधारा या कवि का अनुसरण नहीं किया, बल्कि उनका संपूर्ण लेखन मौलिक रहा।

परिचर्चा में शामिल छत्तीसगढ़ के उपन्यासकार एवं जनसंपर्क विभाग में अधिकारी सौरभ शर्मा ने कहा कि डॉ. विनोद कुमार शुक्ल की रचनाओं में छत्तीसगढ़ और यहां का जन जीवन विशेष रुप से उकेरा गया है। उनकी उपमा, उनके लेखन बेहद साधारण होते भी गहरे अर्थ वाले हैं, जैसे- विनोद कुमार शुक्ल सद्दानी चौक का उल्लेख करते हुए लिखते हैं- यहां लोग इस बात पर सट्टा लगा रहे हैं कि बारिश कितनी देर होगी, कितनी होगी, लेकिन इसी सट्टे में एक पात्र चिंतित है। अगर इतनी देर बारिश होगी तो वह कहां सोएगा, क्योंकि उसके घर की छत चू रही है। सौरभ शर्मा कहते हैं कि यही विनोद कुमार शुक्ल की खासियत है।

इस परिचर्चा में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एव्ं लेख अनुभव शर्मा भी शामिल हुए। वो कहते हैं- शुक्ल की रचनाओं में आए प्रतीक और बिंब हमे आसपास के जीवन में दिख जाता है। पेड़ों का हरहराना और चिडियों का चहचहाना जैसे छोटे छोटे प्रतीक हमारी मिट्टी से उपजे शब्द और प्रतीक को बताते हैं।

डॉ. विनोद कुमार शुक्ल अपनी रचनाओं से लेखन की नई विधा, नया रास्ता तैयार कर गए हैं। (Raipur Sahitya Utsav 2026 second day) कुछ इस तरह कि बेहद सामान्य लगते हुए भी ये रचनाएं बेहद गहरी हैं, कुछ इस तरह कि, चाह कर भी साहित्य का कोई दौर इसे अनदेखा नहीं कर पाएगा और यही सहजता उनकी लेखनी को कालजयी बनाती है।

इन्हे भी पढ़ें: