Nand Kumar Sai Statement: इस दिग्गज नेता का धर्मान्तरण को लेकर बड़ा दावा.. आदिवासियों के साथ इस समाज में भी हो रहे धर्मांतरण पर जताई गहरी चिंता, खुद पढ़ें कहा

Nand Kumar Sai Statement on Conversions: नंदकुमार साय ने धर्मांतरण पर चिंता जताई, आदिवासी और अन्य समाजों में बढ़ती घटनाओं पर कार्रवाई की मांग।

Nand Kumar Sai Statement: इस दिग्गज नेता का धर्मान्तरण को लेकर बड़ा दावा.. आदिवासियों के साथ इस समाज में भी हो रहे धर्मांतरण पर जताई गहरी चिंता, खुद पढ़ें कहा

Nand Kumar Sai Statement on Conversions || IBC24 News File Image

Modified Date: June 24, 2026 / 11:39 pm IST
Published Date: June 24, 2026 11:39 pm IST
HIGHLIGHTS
  • • नंदकुमार साय ने धर्मांतरण पर गहरी चिंता जताई।
  • • धर्मस्वातंत्र्य कानून के तहत कार्रवाई की बात कही।
  • • महारानी दुर्गावती के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

रायपुर। वरिष्ठ आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने धर्मांतरण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के साथ-साथ साहू समाज और अन्य समुदायों के लोगों का भी धर्मांतरण हो रहा है। (Nand Kumar Sai Statement on Conversions) उनके अनुसार यह प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से संचालित की जा रही है। साय ने कहा कि धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और धर्मस्वातंत्र्य कानून के तहत ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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वीरांगना महारानी दुर्गावती को किया याद

आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने आज वीरांगना महारानी दुर्गावती के शहादत दिवस पर उन्हें नमन किया। नन्द कुमार साय ने रायपुर केनाल लिंकिंग रोड स्थित उनके प्रतिमा पर फूल माला अर्पित किया। इस मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मातृभूमि की रक्षा, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाली वीरांगना महारानी दुर्गावती जी का अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

उन्होंने बताया कि इस अवसर पर उनके साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कैबिनेट मंत्री (Nand Kumar Sai Statement on Conversions) राम विचार नेताम, कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे एवं अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि साथ थे।

कौन हैं नंद कुमार साय और कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर?

किसान परिवार में 1 जनवरी 1946 को जन्मे नंदकुमार साय 1973 में नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुए लेकिन नौकरी पर नहीं गए। 1977 में पहली बार अविभाजित मध्य प्रदेश की विधानसभा के लिए चुने गए नंदकुमार साय तीन बार विधायक और तीन बार सांसद रहे हैं। इसके अलावा पार्टी ने उन्हें दो बार राज्यसभा सांसद भी बनाया। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद वे विधानसभा में पहले विपक्ष के नेता बने।

अविभाजित मध्यप्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके नंदकुमार साय को लगता था कि उनके अलावा कोई और आदिवासियों का झंडाबरदार नहीं। लेकिन दौर बदलता गया और अब पार्टी के भीतर विष्णुदेव साय, रामविचार नेताम, केदार कश्यप, रेणुका सिंह, लता उसेंडी जैसी शख्सियतें बीजेपी की सियासत के चेहरे बनते गए। (Nand Kumar Sai Statement on Conversions) 2003 में राज्य में हुए पहले विधानसभा चुनाव में नंदकुमार साय बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। लेकिन पार्टी ने उन्हें अजीत जोगी के खिलाफ मरवाही से टिकट देकर मैदान में उतारा और हारकर वे रेस से बाहर हो गए।

मुख्यमंत्री तो रमन सिंह बन गए, लेकिन सीएम न बन पाने की उनकी टीस बीजेपी में रहते हुए भी कई बार उजागर होती रही। कई बार उन्होंने आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग उठाई और इसी वजह से दिग्गजों की आंख में चुभते भी रहे। लोकसभा की टिकट कटने, फिर राज्यसभा में रिपीट नहीं होने और बीजेपी कोर ग्रुप से बाहर होने के बाद उन्होंने पार्टी के खिलाफ कई बार बयानबाजी की। हालांकि मोदी सरकार में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष बनाकर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया।

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40 साल से नहीं खाया नमक

नंदकुमार साय ने करीब 40 साल से नमक नहीं चखा है। दरअसल, आदिवासी समाज के लोगों में शराब की बुरी लत छुड़ाने के लिए एक बार उन्होंने हजारों किलोमीटर की पदयात्रा की। (Nand Kumar Sai Statement on Conversions) इसी दौरान डुमरमुड़ा गांव में एक आदिवासी ने उनसे कहा कि उनके लिए तो शराब वैसे ही है, जैसे खाने में नमक। क्या वे नमक खाना छोड़ देंगे? साय ने उसी दिन प्रण लिया और तब से आज तक उनके खाने में नमक नहीं होता।

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लेखक के बारे में

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