RSS News Chhattisgarh: RSS सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने किया ‘समरस छत्तीसगढ़’ विशेषांक का विमोचन, जानें क्यों सावरकर और रैदास को किया याद

रायपुर में विश्व संवाद केंद्र छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित ‘समरस छत्तीसगढ़ विशेषांक’ का विमोचन RSS के जागृति मंडल में हुआ। कार्यक्रम में रामदत्त चक्रधर और डॉ. टोपलाल वर्मा ने समाज में समरसता और राष्ट्रीय चरित्र को बनाए रखने पर जोर दिया।

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  • Publish Date - January 17, 2026 / 07:58 PM IST,
    Updated On - January 17, 2026 / 08:00 PM IST

RSS News Chhattisgarh / credit : CGDPR

HIGHLIGHTS
  • समरस छत्तीसगढ़ विशेषांक’ का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जागृति मंडल में हुआ।
  • सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर और प्रान्त संघचालक डॉ. टोपलाल वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
  • समाज में समरसता और राष्ट्रीय चरित्र पर जोर देते हुए विषमता के खिलाफ संदेश दिया गया।

रायपुर : विश्व संवाद केंद्र छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित ‘समरस छत्तीसगढ़ विशेषांक’ का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त कार्यालय जागृति मंडल में शनिवार को सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप  सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रान्त संघचालक माननीय डॉ टोपलाल वर्मा  ने की । विमोचन के अवसर पर रामदत्त चक्रधर जी ने कहा, भारत वर्ष का इतिहास एवं समाज जीवन की रचना अत्यंत प्राचीन है, जो समाज जितना प्राचीन होता है उतना ही उतार-चढ़ाव देखता है। ( Vishwa Samwad Kendra Chhattisgarh  )समाज जब एक रस होता है तो उत्थान की ओर अग्रसर होता है। शरीर के अंगों के काम अलग-अलग हैं, लेकिन सबके अंदर एक रस है। किसी अंग को चोट लगती है तो हर अंग अपनी प्रतिक्रिया देता है। हमारे किसी भी ग्रन्थ में विषमता का कोई उल्लेख नहीं है। (  RSS Chhattisgarh ) आदरणीय डॉ बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर भी यह बात कहते हैं। भारतीय साहित्य में कहीं विषमता और शोषण का उल्लेख नहीं है लेकिन फिर भी समाज में विकृति आई, उसके पीछे सबसे बड़ी वजह हम अपना स्वत्व और मूल राष्ट्रीय चरित्र को भूलना था।

इस्लामिक एवं अंग्रेजों के शासन के समय समाज को तोड़ने का कार्य हुआ इसके बाद भी समाज में लोगों ने कठिन से कठिन कार्य स्वीकार्य कर लिया लेकिन धर्म और अपनी संस्कृति को नहीं छोड़ा। (Samras Chhattisgarh Vishishank) पूज्य बाबा साहब के आदर्श, उनका चिंतन हमें स्मरण करना होगा आज समाज में समरसता के विषय में बहुत अच्छे कार्य हुए, ऋषि मुनियों और महान पुरुषों के योगदान से विषमता कम हुई है लेकिन फिर भी समाज में समरसता हेतु प्रबोधन की आवश्यकता है.संत पूज्य रैदास, महान वीर सावरकर, पं मदन मोहन मालवीय जी समेत अनेक समाज सुधारकों व माँ भारती के सपूतों ने समरसता के लिए प्रयास किया जिससे आज हमारा समाज समरस है।

पूज्य बाबा गुरु घासीदास ने मनखे-मनखे एक समान का मंत्र दिया, उसे देश ही नहीं विश्व को अपनाना होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्धा शिविर में महात्मा गांधी संघ की शाखा में आए तो स्वयंसेवकों से परिचय किया। किसी ने जाति का परिचय नहीं दिया तो वह आश्चर्यचकित रह गए, उन्होंने शाखा कार्य पद्धति की प्रशंसा की। इसी तरह पूज्य बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने भी संघ की शाखा में सामाजिक समरसता का जो भाव देखा उसकी प्रशंसा की।

कार्यक्रम में प्रान्त प्रचारक अभय राम जी, प्रान्त प्रचार प्रमुख संजय तिवारी, रायपुर महानगर संघचालक महेश बिड़ला, सह प्रान्त प्रचार प्रमुख नीरज समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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‘समरस छत्तीसगढ़ विशेषांक’ का विमोचन कहाँ हुआ?

इसका विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त कार्यालय जागृति मंडल, रायपुर में हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौन थे?

मुख्य अतिथि के रूप में माननीय सह सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर उपस्थित थे और कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रान्त संघचालक डॉ. टोपलाल वर्मा ने की।

रामदत्त चक्रधर ने समाज में समरसता पर क्या कहा?

उन्होंने कहा कि समाज में विषमता और शोषण का उल्लेख नहीं है, लेकिन विकृति का कारण हम अपना स्वत्व और राष्ट्रीय चरित्र भूल गए। समाज में समरसता हेतु प्रबोधन की आवश्यकता है।