रायपुर पश्चिम के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए क्या कहता है जनता का मूड मीटर

रायपुर पश्चिम के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए क्या कहता है जनता का मूड मीटर

रायपुर पश्चिम के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए क्या कहता है जनता का मूड मीटर
Modified Date: November 29, 2022 / 08:08 pm IST
Published Date: October 11, 2018 2:19 pm IST

रायपुर। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है छत्तीसगढ़ के रायपुर पश्चिम विधानसभा सीट कीरायपुर पश्चिम छत्तीसगढ़ का वो अहम सियासी केंद्र है जहां बदलते छत्तीसग की पूरी तस्वीर देखी जा सकती हैसियासी तौर पर भी यहां के समीकरण लगातार बदलते रहे  हैं। राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार राजेश मूणत यहां से विधायक हैं और इस समय जीत का चौका लगाने की तैयारी में जुटे हैं लेकिन कांग्रेस भी उनकी तगड़ी घेराबंदी में लगी है

देश में सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में शुमार रायपुर का ये वो इलाका है, जो बदलते हुए इस शहर और बदलते छत्तीसगढ़ की असली तस्वीर पेश करता हैचमचमाती सड़कें, बेहतर अधोसंरचना, विकास नालंदा परिसर, भव्य टाउनशिप और उद्योगों के कैम्पसये इलाका तमाम विविधताओं से भरा नजर आता है और इस क्षेत्र का ये मिजाज ही यहां की सियासत को वो पहेली बनाता है जिसे बूझना हर किसी के बस की बात नही हैलेकिन बीजेपी विधायक राजेश मूणत शायद क्षेत्र के सियासी मूड को बेहतर समझते हैंयही वजह है कि चुनावी नतीजे उनके पक्ष में रहे हैं। विकास की बात करें तो रायपुर पश्चिम में राजधानी रायपुर की बाकी सीटों के मुकाबले यहां काम ज्यादा नजर आता है रामनगर-कोटा सड़क के चौड़ीकरण के बाद आवागमन बेहतर हुआ हैइलाके की जनता को कई अंडरब्रिज की सुविधा भी मिली हैवहीं विकास नालंदा परिसर युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैकोटा स्टेडियम जहां पहले शराबियों का अड्डा हुआ करता था, आज वहां खिलाड़ी अपने खेल में व्यस्त नजर आते हैं। जाहिर है बीजेपी विधायक इन विकास कार्यों को अपनी उपलब्धि बताते हैं तो वहीं कांग्रेस बीजेपी विधायक पर विकास के नाम पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाती है।

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ऐसा नहीं है कि रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में सबकुछ अच्छा ही है क्षेत्र में मौजूद झुग्गी बस्तियों की बात करें तो आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है लोगों को चौबीस घंटे बिजली नहीं मिलती हैवहीं राजधानी होने के बाद भी पानी के लिए महिलाओं को एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। रामनगर, गुढ़ियारी जैसे कई इलाके हैं, जहां बीजेपी विधायक को लेकर नाराजगी देखी जा सकती है। सियासत में अपेक्षाओं का कद नेता के सियासी कद से दुगनी रफ्तार से बढ़ता है और रायपुर पश्चिम में भी ऐसे ही हालात हैंराजेश मूणत के सामने यहां लोगो की अपेक्षाएं पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती है

राजधानी की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में शामिल पश्चिम विधानसभा के  सियासी समीकरण की बात करें तो परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए इस सीट पर बीजेपी का दबदबा हैराजेश मूणत के नेतृत्व में बीजेपी यहां कांग्रेस के मुकाबले मजबूत नजर आती हैजाति समीकरण की बात करें तो यहां साहू वोटर्स सबसे ज्यादा संख्या में हैहालांकि नतीजे बताते हैं कि कास्ट फैक्टर यहां अपना असर नहीं छोड़ पाया है। 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर पिछले दो चुनावों में राजेश मूणत ने तमाम चुनौतियों के बावजूद सफलता पाई हैलेकिन इस बार कांग्रेस ने उन्हें चौतरफा घेरने की रणनीति बनाई हैवैसे रायपुर पश्चिम के सियासी इतिहास की बात की जाए तो पहला नाम जेहन में आता है वो है तरूण चटर्जी का, जो सालों तक यहां की सियासत में छाए रहेउसके बाद ही यहां से राजेश मूणत का दौर शुरू हुआ परिसीमन से पहले रायपुर पश्चिम ग्रामीण विधानसभा सीट के अंतर्गत ही आता था। 2003 में राजेश मूणत पहली बार रायपुर ग्रामीण से चुनाव लड़े और कांग्रेस उम्मीदवार तरूण चटर्जी को हराया। 2008 में परिसीमन के बाद मूणत ने रायपुर पश्चिम से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के संतोष अग्रवाल को मात दी। लेकिन 2 बार चुनाव जीतने के बाद राजेश मूणत को 2013 के विधानसभा चुनाव में काफी पसीन बहाना पड़ादरअसल इस बार कांग्रेस ने युवा विकास उपाध्याय को चुनाव मैदान में उतारा चुनाव परिणाम के दिन विकास पहले राउंड से ही आगे चल रहे थेलेकिन अंतिम राउंड में निर्णय उनके पक्ष में नहीं रहा और राजेश मूणत 6 हजार 150 वोटों विजयी होकर विधानसभा पहुंचे। 

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रायपुर पश्चिम विधानसभा में रायपुर नगर निगम के 20 वार्ड शामिल हैं। इस विधानसभा की मुख्य जगहों में रामनगर, कर्मा चौक, समता कालोनी, डीडीनगर, डंगनिया, कोटा, महोबा बाजार, गुढ़ियारी, टाटीबंध, हीरापुर, रेलवे स्टेशन,जरवाय क्षेत्र प्रमुख है। एक लाख 80 हजार से ज्यादा मतदाता वाले इस क्षेत्र में जातिगत समीकरण की बात करे तो 40 हजार साहू वोटर्स बड़ी सियासी ताकत हैं। परिसीमन के बाद हुए दो विधानसभा चुनाव में यहां से बीजेपी की जीत हुई है। पार्टी इस बार भी विकास कार्य को लेकर मैदान में उतरने जा रही है तो वही कांग्रेस बुनियादी समस्या का हल नहीं मिलने की बात कहकर जनता से वोट मांगने जा रही है।

पिछली बार सीट पर राजेश मूणत और विकास उपाध्याय के बीच सियासी दंगल हुआ था, जिसमें बाजी राजेश मूणत ने मारी थीआगामी 20 नवंबर को होने वाले चुनाव को लेकर एक बार फिर बीजेपी और कांग्रेस के नेता जनता के दरबार पहुंचने लगे हैंबीजेपी से जहां राजेश मूणत को टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा हैवहीं कांग्रेस मे पिछला चुनाव हारने वाले विकास उपाध्याय सहित कई नेता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।

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आगामी 20 नवंबर को रायपुर पश्चिम विधानसभा में वोट डाले जाएंगेइसे लेकर पार्टियां पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई हैंहालांकि बीजेपी और कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया हैबीजेपी की बात करें तो मौजूदा विधायक राजेश मूणत चौथी बार चुनावी जंग में उतरने के लिए तैयार हैंउनके अलावा बीजेपी में कोई दूसरा नेता फिलहाल दावेदारी करता नजर भी नहीं आ रहा वहीं दूसरी ओर कांग्रेस कें संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो दर्जन भर से ज्यादा नेता-कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए दावेदारी पेश की हैइनमें सबसे पहला नाम विकास उपाध्याय का हैपिछला चुनाव हारने के बाद विकास ने क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत बनाईइस सूची में दूसरा बड़ा नाम युवा कांग्रेस नेता सुबोध हरितवाल का है।

वहीं बीजेपी की तरफ मौजूदा विधायक राजेश मूणत का कहना है वे चौथी बार विकास कार्यो को लेकर जनता जर्नादन के बीच जाएंगे। उनका कहना है कि बीजेपी ही इकलौती ऐसी पार्टी है जो अंत्योदय की सोच रखकर विकास करती है। कांग्रेस और बीजेपी भले अब तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया होलेकिन आम आदमी पार्टी ने उत्तम जायसवाल को टिकट देकर यहां सियासी बढ़त जरूर बनाने की कोशिश की है। कुल मिलाकर रायपुर पश्चिम में इस बार सियासी घमासान दिलचस्प होने के पूरे आसार हैंराजेश मूणत जहां पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि वो जीत का चौका लगाएंजहां तक कांग्रेस की सवाल है उसका प्रदर्शन बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा की वो अपनी अंदरूनी लड़ाई से किस तरह निपटती है ।

वेब डेस्क, IBC24


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