Surguja Drinking Water Crisis/Image Source: IBC24
रायपुर। Surguja Drinking Water Crisis: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में भीषण पेयजल संकट (Drinking Water Crisis in Surguja) को दूर करने के लिए प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर पहाड़ी कोरवा (विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह) की बस्तियों और सुदूर वन क्षेत्रों में 113 नए हैंडपंप और बोरवेल स्थापित किए जा रहे हैं। सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को घर के पास शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना और पारंपरिक दूरस्थ जल स्रोतों पर निर्भरता कम करना।
दूरदराज के वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना कि कल्याणकारी योजनाओं, विशेष रूप से आवश्यक सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा दौरे के दौरान पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश थे कि वनांचल में रहने वाले ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहें।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में सरगुजा कलेक्टर एवं डीएमएफ (क्डथ्) अध्यक्ष अजीत वसंत ने प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। उन्होंने संबंधित विभागों और जनपद पंचायत सीईओ को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी 113 हैंडपंप और बोरवेल खनन का कार्य एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाए।
जिला खनिज संस्थान न्यास (क्डथ्) मद से स्वीकृत इन कार्यों का स्थलीय सर्वे पूर्ण हो चुका है। जिला खनिज निधि के कोष का उपयोग करके विभिन्न विकास खंडों में कार्य किया जाएगा, जिनमें लुण्ड्रा में 34, बतौली में छह, लखनपुर में 22, अंबिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 और उदयपुर में चार नए हैंडपंप शामिल हैं।
24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज सहित अन्य सदस्यों ने इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति प्रदान की थी। इस पहल से जिले के सैकड़ों गांवों के हजारों निवासियों, विशेषकर पहाड़ी कोरवा परिवारों को पारंपरिक झरिया और दूरस्थ जल स्रोतों पर निर्भरता से मुक्ति मिलेगी और उन्हें उनके घर के पास ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा।