शह मात The Big Debate| Photo Credit: IBC24
शह मात The Big Debate: रायपुर: मोहन भागवत जब भी कुछ कहते हैं तो उसपर देशभर में चर्चा जरूर छिड़ जाती है। भागवत ने अपने ताजा संबोधन में देश के मुस्लिम और मिशनरी प्रभावित कन्वर्टेड समुदाय की घर वापसी पर आह्वान कर नई बहस छेड़ दी है। भागवत मानना है कि जातियों के बीच का संघर्ष देश-समाज का सबसे बड़ा शत्रु है, (शह मात The Big Debate) जिससे निपटने घर वापसी अभियान तेज करना होगा। सवाल ये है कि क्या ये मुमकिन है, क्या इसके लिए दल वोट-पॉलिटिक्स को साइड रख कर आगे बढ़ पाएंगे?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को लखनऊ में देश के अल्पसंख्यकों को लेकर दो टूक टिप्पणी करते हुए कहा कि, भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू हैं, वे अरब से नहीं आए हैं। उनकी घर वापसी का काम तेज होना चाहिए और जो भी हिंदू धर्म में वापसी करें। उनका खास ख्याल रखें। इसके अलावा संघ प्रमुख ने घुसपैठियों को बाहर करने, (शह मात The Big Debate) हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे करने की नसीहत दी। भागवत ने समाज में जातियों के बीच के झगड़े को सबसे खतरनाक बताते हुए। नियमित तौर पर सामाजिक सद्भाव बैठकें करने पर जोर दिया।
शह मात The Big Debate: संघ प्रमुख की नसीहतों पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। बीजेपी नेताओं ने संघ प्रमुख के बयान का समर्थन (शह मात The Big Debate) किया तो विपक्ष ने बीजेपी और संघ पर तंज कसते हुए कहा कि, भागवत अकसर अपने बयान से पलट जाते हैं, ये ध्यान भटकाने की साजिश है।
साफ है कि संघ प्रमुख ने देश और समाज की मौजूदा समस्याओं पर खुलकर बात रखी है। जिसपर अक्सर पक्ष-विपक्ष में सिर्फ ब्लेमगेम ही दिखा है। अब भागवत अल्पसंख्यकों की हिंदू धर्म में घर वापसी और जातीय झगड़ों को सुलझाने की नसीहत देकर बहस का नया सिरा खोल चुके हैं। सवाल है क्या चुनावी जीत-हार में उलझे (शह मात The Big Debate) सियासी दल इसके लिए तैयार हैं?
इन्हे भी पढ़ें:-