रायपुरः Vishnu Ka Sushasan: छत्तीसगढ़ में साय सरकार के दो वर्ष पूरे होने के साथ ही शासन की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों पर चर्चा तेज हो गई है। इस अवधि में केंद्र सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। विशेष रूप से आवास, आधारभूत ढांचा, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। चूंकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की सत्ता संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया था कि गरीबों की हक और अधिकार के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। उन्हें हर हाल में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का समुचित लाभ दिया जाएगा। इसका परिणाम भी राज्य में देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार ने कई क्षेत्रों में उत्तरोत्तर प्रगति की है। खासकर प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कुछ बड़ी स्कीम्स में। साय सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि छत्तीसगढ़ ने देश में प्रतिदिन सर्वाधिक आवास निर्माण कर नई प्रतिमान गढ़ा है। Aawas Yojana in Chhattisgarh
दरअसल, प्रदेश में पिछली सरकार ने राजनीतिक द्वेश के कारण केंद्र की मोदी सरकार की महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना को रोक कर रखी थी। लिहाजा प्रदेश के कई गरीब परिवार पक्के आवास से वंचित हो गए थे। प्रदेश में भाजपा की नई सरकार बनते ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिणामोन्मुख प्रशासन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया और कैबिनेट की पहली ही बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति कर ऐतिहासिक निर्णय लिया। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजनाओं की मंजूरी का सिलसिला लगातार चल पड़ा। चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि योजना के प्रारंभ से अब तक पहली बार छत्तीसगढ़ ने किसी एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख आवासों के निर्माण का रिकॉर्ड कायम किया है। मानसून अवधि सहित औसतन प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण कर राज्य ने समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और लक्ष्यबद्ध कार्य निष्पादन की नई मिसाल कायम की है।
Vishnu Ka Sushasan: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई वाली सुशासन सरकार ने आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका सृजन को भी समान प्राथमिकता दी गई है। महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री आपूर्ति का कार्य प्रारंभ किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। इस पहल के परिणामस्वरूप 8,000 से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बनकर उभरी हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिलों की सक्रिय भागीदारी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक कार्य संस्कृति इस उपलब्धि का मजबूत आधार बनी है। इस क्रम में बिलासपुर जिले में 29 हजार 235, महासमुंद में 27 हजार 224, बलरामपुर में 27 हजार 12, कोरबा में 26 हजार 839 तथा रायगढ़ जिले में 26 हजार 707 आवासों का निर्माण पूर्ण कर इन जिलों ने राज्य की समग्र उपलब्धि में अग्रणी भूमिका निभाई है।इसके अतिरिक्त मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली एवं जैजैपुर जनपद पंचायतों द्वारा भी 7,500 से अधिक प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कर उल्लेखनीय योगदान दिया गया है।
बता दें कि गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का शुभारंभ अप्रैल 2016 में किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत प्रति आवास 1.20 लाख रूपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही, योजना का अन्य योजनाओं से अभिसरण किया गया है, जिसके तहत मनरेगा से 90 दिवस की मजदूरी तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से 12 हजार रूपए की सहायता शौचालय निर्माण हेतु दी जाती है, जिससे हितग्राही को संपूर्ण आवास सुविधा प्राप्त हो सके। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2016 से 2026 की अवधि के लिए 26.27 लाख आवासों के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 24.37 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 17.14 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में मात्र दो वर्षों में लगभग 8 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है, जो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विगत दो वर्षों के अल्प कार्यकाल में ही लगभग 8 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि राज्य में आवास निर्माण की गति को दर्शाती है। विशेष रूप से पिछले 6 महीनों में प्रतिदिन औसतन 2000 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया, जो प्रशासनिक दक्षता और सतत निगरानी का परिणाम है।
पक्का घर मिलने से न केवल लोगों को सुरक्षित आवास मिला है, बल्कि यह सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्थिरता का भी आधार बना है। निर्माण कार्यों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। महिलाओं के नाम पर या संयुक्त स्वामित्व में मकान पंजीकरण से उन्हें सामाजिक सशक्तिकरण भी मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि आवास जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसरों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साय सरकार ने केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी है। योजनाओं के लिए समय पर फंड उपयोग, लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली और जिला प्रशासन की जवाबदेही तय करने से परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। दो वर्षों के कार्यकाल में राज्य सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि यदि योजनाओं को गंभीरता और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए तो उनका लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना में दर्ज प्रगति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।