नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि वह न केवल एक महान लेखक और विचारक थे बल्कि उन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों को भी आकार दिया।
अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में मोदी ने चिली में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को बढ़ावा देने वाले एक संगठन की भी सराहना की और कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और भविष्य के लिए आवश्यक हैं।
मोदी ने कहा कि नौ मई को ‘पोच्चीशे बोइशाख’ के अवसर पर हम गुरुदेव टैगोर की जन्म-जयंती मनाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘गुरुदेव बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक महान लेखक और विचारक तो थे ही, उन्होंने कई प्रसिद्ध संस्थानों को भी आकार दिया।’’
प्रधानमंत्री के अनुसार गुरुदेव टैगोर लोगों के लिए ऐसे उद्योगों के पक्षधर थे, जिनमें स्थायी रोजगार मिलने के साथ ही गांवों का भी कल्याण हो।
मोदी ने कहा कि उनके रवींद्र संगीत का प्रभाव आज भी दुनिया-भर में बना हुआ है। मेरे लिए शांति निकेतन की यात्राएं अविस्मरणीय रहीं।
उन्होंने कहा, ‘‘शांतिनिकेतन की मेरी यात्राएं अविस्मरणीय रहेंगी। यह वही संस्थान है, जिसे उन्होंने पूरे समर्पण भाव से सींचा और संवारा था। उन्हें एक बार फिर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।’’
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अप्रैल और मई के महीने में देश के कई हिस्सों में नववर्ष सहित कई पर्व-त्योहार मनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आगामी बुद्ध पूर्णिमा (एक मई) सभी को शांति को बढ़ावा देने, करुणा को अपनाने और संतुलन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘साथियो, दक्षिण अमेरिका के चिली में एक संस्था भगवान बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ा रही है। लद्दाख में जन्मे ड्रबपोन ओत्जर रिनपोचे के मार्गदर्शन में काम हो रहा है। ये संस्था ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कोचीगुआज घाटी में बना स्तूप लोगों को शांति का अनुभव कराता है। वाकई, यह देखकर गर्व होता है। भारत की प्राचीन धारा दुनिया तक पहुंच रही है। दूर-दराज के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं।’’
मोदी ने कहा कि बौद्ध परंपरा हमें प्रकृति से जुड़ना भी सिखाती है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भगवान बुद्ध को ज्ञान एक वृक्ष के नीचे मिला था।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रकृति हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। देश में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं। कर्नाटक में ‘कर्मा मॉनस्टेरी’ इसका अच्छा उदाहरण है। यह मठ एक जीवंत वन क्षेत्र है, जो 100 एकड़ में फैला है। इस वन में 700 से अधिक देसी वृक्षों को संरक्षित किया गया है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘बुद्ध का संदेश सिर्फ अतीत नहीं है। यह आज भी प्रासंगिक है और भविष्य के लिए भी जरूरी है।’’
भाषा सुरभि गोला
गोला