AAP Protest In Punjab/Image Credit: X Handle
AAP Protest In Punjab: नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी को शुक्रवार को मिले झटके पर शनिवार दिन भर रिएक्शन आते रहे। जिस पार्टी ने ‘ईमानदारी’ के दम पर देश की राजनीति बदलने का दावा किया था, उसी के किले में ऐसी सेंध लगी, जिसने दिल्ली से पंजाब तक हड़कंप मचा दिया।
राघव चड्ढा, हरभजन सिंह और अशोक मित्तल समेत AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पाला बदल लिया है। दो-तिहाई सांसदों के इस ‘महा-विलय’ ने अरविंद केजरीवाल की रणनीति को चारों खाने चित कर दिया है। भाजपा का दामन थामते ही राघव चड्ढा ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि, AAP अब वो पार्टी नहीं रही जिसे खून-पसीने से सींचा गया था, (AAP Protest In Punjab) बल्कि यह अब भ्रष्ट और समझौतावादी हाथों में जा चुकी है।
AAP Protest In Punjab: लेकिन इस बगावत की आग सबसे ज्यादा पंजाब में धधक रही है। जालंधर में आप कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा.. पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह के घर की दीवारों पर ‘गद्दार’ लिख दिया गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि.. जिन्हें सिर आंखों पर बिठाया, उन्होंने ही पीठ में छुरा घोंपा है।
इधर, स्वाति मालीवाल ने तो सीधा मोर्चा खोल दिया है। मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल को देश का ‘सबसे बड़ा गद्दार’ करार देते हुए उनके 100 करोड़ के बंगले, (AAP Protest In Punjab) आलीशान सोफे और पंजाब को ATM की तरह इस्तेमाल करने के आरोपों की झड़ी लगा दी है।
भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा है कि, भाजपा सिंहद्वार वाली पार्टी है..यहां हर तरह के लोग प्रवेश कर सकते हैं।
AAP Protest In Punjab: हालांकि, आम आदमी पार्टी इस हार को इतनी आसानी से स्वीकार करने वाली नहीं है। (AAP Protest In Punjab) संजय सिंह ने इसे असंवैधानिक करार दिया है और सातों सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए राज्यसभा सभापति को पत्र लिखने का मन बना लिया है। वहीं, कानून के जानकार कपिल सिब्बल ने इसे संविधान की कम और ‘रिश्वत की समझ’ का खेल बताया है..
इस पूरे घमासान के बीच रालेगण सिद्धि से अन्ना हजारे की आवाज भी गूंजी है। (AAP Protest In Punjab) अन्ना ने इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया और साफ कहा कि स्वार्थ के लिए पार्टियां बदलना संविधान की मर्यादा के खिलाफ है।
अब सवाल यह है कि क्या 10वीं अनुसूची इन सांसदों की कुर्सी बचा पाएगी? क्या यह वाकई ‘विलय’ है या सिर्फ एक सियासी दगाबाजी? दिल्ली की सियासत अब अदालत और संसद के गलियारों में एक नई जंग की गवाह बनने वाली है।
इन्हे भी पढ़ें:-