नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को देश भर के नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उन आवासीय भवनों के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दें, जिनका इस्तेमाल वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है और नियमों का उल्लंघन पाये जाने पर उन्हें सील कर दें।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि जिन इलाकों को किसी विशेष उपयोग (जैसे रिहायशी या वाणिज्यिक) के लिए निर्दिष्ट नहीं किया गया है उन पर भी गौर किया जाएगा, लेकिन अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
पीठ ने कहा, ‘‘हम यह स्पष्ट कर देते हैं कि सभी अधिकारियों को यह प्रक्रिया बिना किसी भेदभाव के पूरी करनी होगी। अगर वे चुनिंदा तरीके से कार्रवाई करने का तरीका अपनाते हैं, तो न्यायालय इस मामले में कड़ा रुख अपनाएगा।’’
न्यायालय ने पूर्व में भवन और जमीन के उपयोग से जुड़े नियमों के बड़े पैमाने पर और खुलेआम उल्लंघन का संज्ञान लिया था।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि लागू नियमों और नियमन का खुलेआम उल्लंघन करके अक्सर निर्माण कार्य किए जाते हैं, जिनमें प्रतिबंधित इलाके भी शामिल हैं।
न्यायालय ने कहा, ‘‘इससे भी अहम बात यह है कि काम पूरा होने के बाद, ऐसी भूमि और भवन का उपयोग अक्सर उन कामों के अलावा दूसरे कामों के लिए किया जाता है, जिनके लिए सक्षम प्राधिकार ने मूल रूप से मंजूरी दी थी।’’
न्यायालय ने चेन्नई में अवैध निर्माण से जुड़ी एक याचिका का दायरा बढ़ाते हुए यह आदेश दिया था और देश के स्तर पर इस मामले पर विचार करने का फैसला किया था।
भाषा सुभाष वैभव
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