चुनाव में करारी हार के बाद इस्तीफों की झड़ी, तृणमूल के गढ़ ढहने लगे हैं

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चुनाव में करारी हार के बाद इस्तीफों की झड़ी, तृणमूल के गढ़ ढहने लगे हैं

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  • Publish Date - May 28, 2026 / 12:49 AM IST,
    Updated On - May 28, 2026 / 12:49 AM IST

कोलकाता, 27 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के राजनीतिक झटके अब पार्टी के सबसे मजबूत और सबसे स्थायी सत्ता केंद्रों में से एक -नगर निकायों- में भी दिखने लगे हैं, जहां इस्तीफे बड़े पैमाने पर नजर आ रहे हैं और असंतोष की सार्वजनिक अभिव्यक्ति उन संरचनाओं में खींचतान के साफ संकेत दे रही है, जो कभी इसकी जमीनी मशीनरी की रीढ़ थीं।

हाल ही में एक और बड़ा झटका देते हुए, कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के पार्षदों- सुशांत घोष और अरूप चक्रवर्ती- ने बुधवार को अहम निकाय पदों से इस्तीफा दे दिया, और इस अवसर का उपयोग पार्टी नेतृत्व और हार के बाद स्थिति से निपटने के उसके तरीके पर असामान्य रूप से मुखर हमला करने के लिए किया।

घोष ने बरो-12 के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि चक्रवर्ती ने नगर निकाय की लेखा समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। हालांकि, दोनों ने पार्षद के अपने पद बरकरार रखे।

उनकी टिप्पणियों में इस्तीफे से भी अधिक तीखापन था।

चक्रवर्ती ने पत्रकारों से कहा, “हार स्वीकार करनी ही होगी। अगर हम हार स्वीकार नहीं करते, तो पिछली जीतें भी अर्थहीन हो जाती हैं।” इसे कई लोग पार्टी नेतृत्व के उन वर्गों के लिए एक अप्रत्यक्ष खंडन के रूप में देखते हैं, जिन्होंने चुनावी हार के पैमाने और विमर्श पर सवाल उठाए थे।

दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद वरिष्ठ मंत्री और प्रभावशाली नेता पहुंच से बाहर हो गए हैं।

चक्रवर्ती ने कहा, “कई सालों तक हम मुख्यमंत्री तक पहुंच भी नहीं पाए, क्योंकि उनके इर्द-गिर्द कुछ लोग हमेशा रहते थे थे। हार के बाद, उनमें से कई नेता सड़कों से गायब हो गए।”

राजनीतिक रूप से संवेदनशील एक टिप्पणी में, उन्होंने “विस्थापित” समर्थकों को घर लौटने में मदद करने के लिए भाजपा सरकार को धन्यवाद भी दिया। यह एक ऐसा बयान था, जिसने भविष्य में संभावित राजनीतिक पुनर्गठन को लेकर अटकलों को जन्म दिया।

कुछ ही दिन पहले, पार्षद देबोलीना बिस्वास ने केएमसी के बोरो-9 के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि भवानीपुर में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर असंतोष था। भवानी को कभी तृणमूल के सबसे सुरक्षित गढ़ों में से एक माना जाता था।

ये घटनाक्रम इस महीने की शुरुआत में राज्य में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल के भीतर बढ़ते आंतरिक असंतोष के बीच सामने आए हैं।

वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने हाल ही में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, वहीं कई नेताओं, विधायकों और पार्षदों ने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व के प्रति असंतोष व्यक्त किया है। कुछ ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई पार्टी बैठकों में भाग नहीं लिया, जबकि अन्य ने संगठन के कामकाज पर खुले तौर पर सवाल उठाए हैं।

पार्टी और नगर निकाय सूत्रों के अनुसार, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से नगरपालिकाओं में कम से कम 60 तृणमूल पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है या संगठनात्मक जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर लिया है।

पश्चिम बंगाल के 128 नगर निकायों में से 125 पर अब भी नियंत्रण रखने वाली पार्टी के लिए ये घटनाक्रम एक विचित्र स्थिति को दर्शाते हैं।

भाषा

प्रशांत सुरेश

सुरेश