अहमदाबाद विमान दुर्घटना: परिवारों ने स्वतंत्र सिम्युलेटर परीक्षण, रिपोर्ट जारी करने की समयसीमा मांगी

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अहमदाबाद विमान दुर्घटना: परिवारों ने स्वतंत्र सिम्युलेटर परीक्षण, रिपोर्ट जारी करने की समयसीमा मांगी

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  • Publish Date - July 12, 2026 / 07:31 PM IST,
    Updated On - July 12, 2026 / 07:31 PM IST

अहमदाबाद, 12 जुलाई (भाषा) एअर इंडिया के एआई-171 विमान की दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों ने नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू को पत्र लिखकर जांच के बारे में नियमित जानकारी, स्वतंत्र सिम्युलेटर सत्यापन परीक्षण और जांच दल में बोइंग 787 के एक अनुभवी पायलट को शामिल करने की मांग की है।

उन्होंने मंत्रालय से यह भी अनुरोध किया कि वह अंतिम जांच रिपोर्ट जारी करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा की घोषणा करे और यह सुनिश्चित करे कि इसे जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाए।

ऐसे लगभग 30 परिवारों ने अपने कानूनी अधिकारों की सुरक्षा की भी मांग की। उनका आरोप था कि एयरलाइन पीड़ितों के परिवारों से एक ‘रिलीज डॉक्यूमेंट’ (समझौता पत्र) पर हस्ताक्षर करने को कह रही थी। ऐसा लग रहा था कि इस दस्तावेज के तहत उन्हें न सिर्फ एअर इंडिया के खिलाफ, बल्कि विमान और उसकी प्रणाली से जुड़ी विदेशी कंपनियों के खिलाफ भी अपने कानूनी अधिकार छोड़ने पड़ते।

यह जानकारी रविवार को मीडिया के साथ साझा की गई।

अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से 12 जून, 2025 को उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद लंदन-गैटविक जाने वाली एअर इंडिया की उड़ान एआई-171 दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह कई दशकों में भारत की सबसे घातक विमान दुर्घटना थी।

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर में जा गिरा, जिससे विमान में सवार 242 यात्रियों में से 241 और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई।

पत्र में, मृतकों के रिश्तेदारों ने मंत्री से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करें कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा की जाने वाली जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समय-सीमा के भीतर हो।

उन्होंने दावा किया कि परिवारों को जांच की प्रगति के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही और उन्होंने एएआईबी से अनुरोध किया कि वह हर 15 या 30 दिनों में अद्यतन जानकारी देने के लिए बातचीत का एक औपचारिक जरिया बनाए।

पीड़ितों के परिवारों ने एएआईबी अधिकारियों के साथ समय-समय पर बैठकें या सम्मेलन करने की भी मांग की, ताकि वे जांच के बारे में सवाल पूछ सकें और स्पष्टीकरण पा सकें।

मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए परिवारों ने कहा कि जांच समिति में बोइंग 787 उड़ाने का अनुभव रखने वाला कोई स्वतंत्र वाणिज्यिक पायलट शामिल नहीं है।

उन्होंने अनुरोध किया कि विमान दुर्घटना जांच में विशेषज्ञता रखने वाले एक अनुभवी बोइंग 787 पायलट को जांच में शामिल किया जाए।

पत्र में ‘भारतीय पायलय महासंघ’ की उस मांग का भी समर्थन किया गया जिसमें प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में उल्लिखित घटनाक्रम की पुष्टि के लिए स्वतंत्र पूर्ण-उड़ान सिम्युलेटर सत्यापन परीक्षण कराने की बात कही गई थी।

रिश्तेदारों ने एअर इंडिया की ओर से मुआवज़े से जुड़े दस्तावेज़ प्रसारित किये जाने पर भी चिंता जताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि एयरलाइन पीड़ितों के परिवारों से एक ‘रिलीज डॉक्यूमेंट’ (समझौता पत्र) पर दस्तखत करने को कह रही थी। ऐसा लग रहा था कि इस दस्तावेज के तहत उन्हें न सिर्फ एअर इंडिया के खिलाफ, बल्कि विमान और उसके सिस्टम से जुड़ी विदेशी कंपनियों—जैसे बोइंग, जनरल इलेक्ट्रिक, जीई एरोस्पेस, सैफ्रान और हनीवेल—के खिलाफ भी अपने कानूनी अधिकार छोड़ने पड़ते।

परिवारों ने ऐसी शर्त का विरोध करते हुए कहा कि उनसे तब तक कानूनी अधिकार छोड़ने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए, जब तक कि दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट जारी न हो जाए और दुर्घटना से जुड़ी सभी बातें स्पष्ट न हो जाएं।

भाषा प्रशांत वैभव

वैभव