नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस सहित विपक्ष के हंगामे और सदन से उनके वॉकआउट करने की ओर परोक्ष संकेत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि देश में पर्यावरण शुद्धि के साथ-साथ राजनीतिक प्रदूषण की भी शुद्धि आवश्यक है।
तिवाड़ी ने उच्च सदन में यह टिप्पणी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भाग लेते हुए की। इससे पहले आज सदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर का पश्चिम एशिया के ताजा हालात को लेकर एक बयान हुआ था और इस बयान पर चर्चा कराने की मांग को लेकर कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों ने सदन से बहिर्गमन किया।
पर्यावरण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों के सदन में नहीं होने की ओर परोक्ष संकेत करते हुए घनश्याम तिवाड़ी ने कहा, ‘‘हम जलवायु ठीक करना चाहते हैं, पर्यावरण ठीक करना चाहते हैं, राजनीतिक रूप से जो पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, वो सदन में बार-बार हो रहा है।’’
उन्होंने कहा कि पर्यावरण की शुद्धि के साथ-साथ राजनीतिक प्रदूषण की शुद्धि भी आवश्यक है, इस पर भी सभी को विचार करना चाहिए।
तिवाड़ी ने कहा कि संप्रग के शासनकाल के दौरान 2012-13 में पर्यावरण मंत्रालय के लिए 2,430 करोड़ रूपये दिये गये थे जो मोदी सरकार ने 2026-27 के बजट में बढ़ाकर 3,759 करोड़ से अधिक कर दिये।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के लिए मोदी सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘मां के नाम एक पेड़’ अभियान को लेकर भावनात्मक अपील की।
भाजपा सांसद ने कहा कि इस भावनात्मक अपील का परिणाम था कि देश में 262.4 करोड़ पौधे लगाये गये। उन्होंने दावा किया कि यह आज तक का सबसे बड़ा (पौधारोपण) अभियान है।
उन्होंने बाघ सरंक्षण के लिए सरकार द्वारा किए गये प्रयासों के परिणामों की चर्चा करते हुए कहा कि 2010 में बाघों की संख्या 1,706 थी जो 2022 में बढ़कर 3,682 हो गयी। उन्होंने कहा कि आज विश्व के 75 प्रतिशत बाघ भारत में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने पंचामृत प्रतिज्ञा करवायी थी, जिसके तहत 2023 तक 500 गीगाबाइट गैर जीवाश्म ऊर्जा, 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा, एक अरब टन उत्सर्जन कटौती, 45 प्रतिशत कार्बन तीव्रता में कमी और 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने की बात थी।’’
तिवाड़ी ने कहा कि 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है जो बहुत बड़ा काम है।
चर्चा में भाग लेते हुए रामभाई मोकरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को अपना व्यक्तिगत अभियान बना लिया है। उन्होंने अपनी बात गुजराती भाषा में रखी।
भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति को देवता मानता है, मां मानता है और इस समाज ने वृक्षों और वनों की जितनी रक्षा की है, उतनी कोई और नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सभी को पर्यावरण संरक्षण के लिए इन लोगों से सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पर जो अभियान चलाया है, उसकी लोगों के बीच काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और अब लोग अपनी मां ही नहीं पिता, भाई, बहन या अन्य संबंधियों के नाम पर भी वृक्ष लगा रहे हैं।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा की मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि भारत में कई समाजों में लोग नदी को अपनी माता मानते हैं किंतु आज देश की विभिन्न नदियों के साथ जो व्यवहार हो रहा है, वह तो उन देशों में भी नहीं होता जहां नदी को माता नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में बच्चों को शुरुआती शिक्षा में ही मूल्य विकसित किए जाने चाहिए।
भाषा माधव वैभव
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