अमानतुल्ला पर अनियमितताओं के आरोप, उन्हें वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बनाने पर कैसे हो सकता है विचार: अदालत

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अमानतुल्ला पर अनियमितताओं के आरोप, उन्हें वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बनाने पर कैसे हो सकता है विचार: अदालत

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  • Publish Date - October 19, 2020 / 12:35 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:37 PM IST

नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को आप सरकार से कहा कि वह विधायक अमानतुल्ला खान को वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बनाने की अनुमति कैसे दे सकती है जबकि उनके खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए सोशल ऑडिट शुरू किया गया है।

न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार से यह प्रश्न किया। याचिका में उस अधिसूचना को रद्द करने का अनुरोध किया गया है जिसमें अमानतुल्ला समेत वक्फ बोर्ड के सदस्यों में से बोर्ड का अध्यक्ष चुनने के लिए सोमवार को उनकी बैठक बुलाई गयी।

पीठ ने कहा, ‘‘मुद्दा यह है कि क्या अनियमितताओं के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को बोर्ड का अध्यक्ष बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए जबकि दिल्ली सरकार ने उनके खिलाफ आरोपों में सोशल ऑडिट का आदेश दिया है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘उन्हें व्यवस्था का हिस्सा ही क्यों बनने देना चाहिए, जब उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।’’

याचिकाकर्ता मोहम्मद इकबाल खान द्वारा वकील विजय किंगर के माध्यम से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने यह बात कही।

दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) संजय जैन ने कहा कि बोर्ड का स्पेशल ऑडिट से कोई लेना-देना नहीं है और इसके परिणाम सीधे सरकार को बताये जाएंगे।

तब पीठ ने पूछा कि क्या खान अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी करना चाहते हैं।

खान की ओर से वकील के सी मित्तल ने पीठ से कहा कि अगर कोई सदस्य उनके नाम का प्रस्ताव रखता है तो वह लड़ेंगे।

अदालत ने कहा कि याचिका में उठाये गये विषय पर विचार करने की जरूरत है और समय की कमी के कारण सोमवार को यह संभव नहीं है।

एएसजी जैन ने कहा कि अध्यक्ष के चुनाव के लिए बोर्ड की बैठक 19 नवंबर तक स्थगित की जाएगी। तब पीठ ने अगली सुनवाई के लिए नौ नवंबर की तारीख तय की।

भाषा वैभव दिलीप

दिलीप