नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका अरुंधति रॉय ने घोषणा की है कि वह बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में शामिल नहीं होंगी, क्योंकि महोत्सव के निर्णायक मंडल (ज्यूरी) के सदस्यों ने ‘गाजा में हुए नरसंहार’ के बारे में ‘अत्यंत अस्वीकार्य बयान’ दिए हैं।
रॉय को ‘क्लासिक्स सेक्शन’ के तहत अपनी 1989 की फिल्म ‘इन व्हिच एनी गिव्स इट दोज वन्स’ की स्क्रीनिंग के लिए महोत्सव में शामिल होना था।
शुक्रवार को ‘द वायर’ में प्रकाशित एक बयान के अनुसार, ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ की लेखिका ने कहा, ‘‘निर्णायक मंडल के सदस्यों का यह कहना कि कला में राजनीति का स्थान नहीं होना चाहिए, स्तब्ध कर देने वाला है।’’
रॉय ने कहा कि आज सुबह दुनिया भर के लाखों लोगों की तरह उन्होंने गाजा में हुए नरसंहार पर बर्लिन फिल्म महोत्सव के निर्णायक मंडल के सदस्यों के अस्वीकार्य बयान सुने।
रॉय ने अपने बयान में कहा, ‘‘उन्हें यह कहते हुए सुनना कि कला में राजनीति का स्थान नहीं होना चाहिए, स्तब्ध कर देने वाला है। यह मानवता के खिलाफ एक अपराध के बारे में बातचीत को बंद करने का एक तरीका है, जबकि यह हमारे सामने वास्तविक समय में घटित हो रहा है – ऐसे समय में जब कलाकारों, लेखकों और फिल्म निर्माताओं को इसे रोकने के लिए यथा शक्ति सब कुछ करना चाहिए।’’
इस वर्ष के निर्णायक मंडल की अध्यक्षता जर्मन फिल्म निर्माता विम वेंडर्स कर रहे हैं और इसमें अमेरिकी निर्देशक-निर्माता रेनाल्डो मार्कस ग्रीन, जापानी फिल्म निर्माता हिकारी, नेपाली निर्देशक मिन बहादुर भाम, दक्षिण कोरियाई अभिनेता बे डूना, भारतीय निर्देशक-निर्माता शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर और पोलिश फिल्म निर्माता ईवा पुस्जिंस्का शामिल हैं।
महोत्सव के औपचारिक उद्घाटन से पहले बृहस्पतिवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में निर्णायक मंडल के अध्यक्ष और जर्मन निर्देशक विम वेंडर्स से ‘गाजा में हुए नरसंहार के प्रति जर्मनी के समर्थन’ और ‘मानवाधिकारों के प्रति चयनात्मक व्यवहार’ पर उनके विचार पूछे गए। इस पर उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं को ‘राजनीति से दूर रहना चाहिए’।
‘परफेक्ट डेज’ के निर्देशक ने कहा, “अगर हम ऐसी फिल्मे बनाते हैं जो पूरी तरह से राजनीतिक हों, तो हम राजनीति के क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं। लेकिन हमें राजनीति के सापेक्ष संतुलन बनाना है। हम राजनीति के उलट हैं। हमें जनता का काम करना है, न कि राजनेताओं का।’’
सबसे पहले जवाब देने वाले पुस्जिंस्का ने कहा कि यह सवाल ‘कुछ हद तक अनुचित’ था।
उन्होंने कहा, ‘‘बेशक, हम लोगों से, हर एक दर्शक से, बात करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे सोच-विचार करें, लेकिन हम इस बात के लिए जिम्मेदार नहीं हो सकते कि वे इजराइल का समर्थन करने का फैसला करेंगे या फलस्तीन का समर्थन करने का निर्णय लेंगे।’’
अपने बयान में रॉय ने ‘इजराइल द्वारा फलस्तीनी लोगों के नरसंहार’ की कड़ी निंदा करते हुए अमेरिका और जर्मनी को ‘इस अपराध में भागीदार’ बताया।
रॉय ने कहा, ‘‘मैं यह स्पष्ट रूप से कहती हूं कि गाजा में जो कुछ हुआ है, और जो कुछ हो रहा है, वह इजराइल द्वारा फलस्तीनी लोगों का नरसंहार है। इसे अमेरिका और जर्मनी की सरकारों के साथ-साथ यूरोप के कई अन्य देशों का समर्थन और वित्तीय सहायता प्राप्त है, जो उन्हें इस अपराध में भागीदार बनाता है।’’
रॉय (64) ने कहा, ‘‘अगर हमारे समय के महानतम फिल्म निर्माता और कलाकार खुलकर ऐसा नहीं कह सकते, तो उन्हें पता होना चाहिए कि इतिहास उनका मूल्यांकन करेगा। मैं स्तब्ध और निराश हूं। मुझे बहुत खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि मैं ‘बर्लिनाले’ में शामिल नहीं हो पाऊंगी।’’
रॉय ने कहा कि वह भले ही फलस्तीन पर जर्मन सरकार के रुख से ‘बेहद परेशान’ थीं, लेकिन उन्हें जर्मन दर्शकों की राजनीतिक एकजुटता दिखी।
भाषा संतोष पवनेश
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