असम विधानसभा में महिला आरक्षण का समर्थन करने वाला प्रस्ताव पारित

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असम विधानसभा में महिला आरक्षण का समर्थन करने वाला प्रस्ताव पारित

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 05:44 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 05:44 PM IST

गुवाहाटी, 26 मई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। यह आरोप तब लगाया गया जब संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करने वाले सरकारी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी पार्टी ने विधानसभा से संक्षिप्त रूप से बहिर्गमन किया।

शर्मा ने दावा किया कि कांग्रेस विधायकों को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से निर्देश मिले थे कि प्रस्ताव पारित किये जाने के समय वे सदन में उपस्थित न रहें।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तब समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे अपने सहयोगियों की महिला विरोधी नीतियों के आगे घुटने टेक दिए, जब उन्होंने संसद में आरक्षण विधेयक को पारित होने से रोक दिया था।

महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अजंता नियोग ने सोमवार को प्रस्ताव पेश किया कि ‘‘महिलाओं की शक्ति का सम्मान करने और महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तीकरण को सुनिश्चित करने के लिए, परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संसद और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए’’।

जब शर्मा ने प्रस्ताव पर बोलना शुरू किया, तो भाजपा विधायक भुवन पेगू द्वारा अपने भाषण में कांग्रेस के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस और रायजोर दल के विधायक कुछ देर के लिए सदन से बाहर चले गए। हालांकि, प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने से पहले कांग्रेस सदस्य वापस सदन में लौट आए।

प्रस्ताव का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में देवी कामाख्या से लेकर अहोम राजकुमारी जॉयमोती और स्वतंत्रता सेनानी कनकलता तक, नारी शक्ति को सम्मान देने की एक समृद्ध परंपरा रही है।

उन्होंने राज्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 40 लाख महिलाओं के योगदान का भी उल्लेख किया, जो अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रही हैं। इसके बाद ध्वनि मत से प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

भाषा संतोष माधव

माधव