(मोहित सैनी)
नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) आईआईटी परिसरों में आत्महत्या के ‘‘लगातार बढ़ते संकट’’ को देखते हुए केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने इन संस्थानों में उच्चस्तरीय समितियां गठित करने की सिफारिश की है। आयोग ने सुधारात्मक कदमों की ‘‘अत्यधिक आवश्यकता’’ पर जोर देते हुए कहा है कि ये समितियां उन कारणों की पहचान करें और उनका समाधान करें जिनकी वजह से छात्र आत्मघाती कदम उठा रहे हैं।
शीर्ष पारदर्शिता निगरानी संस्था की यह सिफारिश आईआईटी मद्रास, आईआईटी जोधपुर, आईआईटी गोवा और आईआईटी कानपुर में आत्महत्या के मामलों का विवरण सार्वजनिक करने से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के इनकार के बाद दायर की गईं विभिन्न अपील पर सुनवाई के दौरान आई।
आयोग ने इस निर्णय को बरकरार रखा कि यह जानकारी तीसरे पक्ष के व्यक्तिगत डेटा के अंतर्गत आती है और इसका खुलासा नहीं किया जा सकता, लेकिन कहा कि संस्थानों को निवारक तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य पहलों के संबंध में पारदर्शिता को मजबूत करना चाहिए।
सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने कहा कि आईआईटी परिसरों में प्रतिवर्ष आत्महत्याओं का ‘‘लगातार संकट’’ बना रहता है, जिनमें आईआईटी कानपुर और आईआईटी खड़गपुर जैसे संस्थानों में ‘‘अधिक मामले’’ हैं, और विश्वविद्यालयों को ऐसी घटनाओं के कारणों का समाधान करने के लिए समिति गठित करने की ‘‘अत्यधिक आवश्यकता’’ है, यदि वे पहले से गठित नहीं हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऐसी समितियों के गठन और कामकाज से संबंधित विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराएं।
हाल में प्रकाशित राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मद्देनजर यह आदेश महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2024 में आत्महत्या के समग्र मामलों में मामूली गिरावट आई, जबकि छात्रों के आत्महत्या करने की घटनाओं में वृद्धि जारी रही।
एनसीआरबी की ‘भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्याएं 2024’ नामक रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों के आत्महत्या करने की घटनाएं 2023 में 13,892 थीं, जो 2024 में बढ़कर 14,488 हो गईं। यह लगभग 4.3 प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष 2024 में आत्महत्या करने वाले लोगों में छात्रों का आंकड़ा 8.5 प्रतिशत था, जो इससे एक साल पहले के 8.1 प्रतिशत से अधिक है।
आंकड़ों के अनुसार, लगभग हर दिन 40 छात्र आत्महत्या करते हैं, यानी लगभग हर 36 मिनट में एक आत्महत्या।
सीआईसी का आदेश आईआईटी के पूर्व छात्र धीरज कुमार सिंह द्वारा दायर अपील पर आया, जिनमें उन्होंने 2005 से आईआईटी में आत्महत्या करने वाले छात्रों, विद्वानों और अनुसंधान कर्मियों की आयु, लिंग, जाति या श्रेणी, शैक्षणिक कार्यक्रम, मूल राज्य और मृत्यु के स्थान जैसे विवरण मांगे थे।
सुनवाई के दौरान, सिंह ने आयोग को बताया कि वह छात्रों के पुनर्वास और मानसिक परामर्श के लिए एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) संचालित कर रहे हैं और आत्महत्याओं के पीछे के मूल कारणों का विश्लेषण करने एवं परामर्श प्रयासों को मजबूत करने के लिए जानकारी चाहते हैं।
हालांकि, आईआईटी ने गोपनीयता छूट का हवाला देते हुए नाम, आयु और जाति जैसे व्यक्तिगत विवरणों के खुलासे से इनकार कर दिया।
आयोग ने उनके निर्णय को कायम रखते हुए कहा कि यह जानकारी तीसरे पक्ष के व्यक्तिगत डेटा के बराबर है और इसका खुलासा नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही, सीआईसी ने कहा कि संस्थानों को निवारक तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य पहलों के संबंध में पारदर्शिता को मजबूत करना चाहिए।
भाषा नेत्रपाल नरेश
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