असम लंबे समय से जनसांख्यिकीय परिवर्तन का सामना कर रहा: हिमंत

असम लंबे समय से जनसांख्यिकीय परिवर्तन का सामना कर रहा: हिमंत

असम लंबे समय से जनसांख्यिकीय परिवर्तन का सामना कर रहा: हिमंत
Modified Date: May 26, 2026 / 10:07 pm IST
Published Date: May 26, 2026 10:07 pm IST

गुवाहाटी, 26 मई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि राज्य में लंबे समय से जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने देश भर में इस घटना का अध्ययन करने के लिए केंद्र द्वारा गठित समिति का स्वागत किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को घोषणा की कि केंद्र ने ‘अवैध प्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों’ से भारत भर में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का आकलन करने के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नौलेकर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अवैध घुसपैठ और असामान्य जनसांख्यिकीय परिवर्तन केवल किसी एक राज्य की चिंता का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संतुलन से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है।’’

उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन एक ‘दूरदर्शी और निर्णायक कदम’ है।

शर्मा ने कहा, ‘‘माननीय अमित शाह जी के सक्रिय नेतृत्व में यह समिति देश भर में हो रहे असामान्य जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करेगी और ठोस समाधान प्रस्तुत करेगी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत होगी और सीमावर्ती क्षेत्रों की चिंताओं का गंभीरता से समाधान संभव हो सकेगा।’’

उन्होंने कहा कि असम लंबे समय से जनसांख्यिकीय परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह पहल हमारी सांस्कृतिक विरासत, आदिवासी समाज और स्वदेशी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। हमें विश्वास है कि यह समिति भारत के भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।’’

समिति की घोषणा करते हुए शाह ने कहा कि घुसपैठ और अन्य कारणों से ‘अस्वाभाविक’ जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहा है, जो किसी भी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस समस्या से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय जनसांख्यिकीय मिशन की घोषणा की थी।

मोदी ने कहा था कि अवैध घुसपैठ के माध्यम से देश की जनसांख्यिकी को बदलने की ‘सोची-समझी साजिश’ रची जा रही है।

उन्होंने चेतावनी दी थी कि जब जनसांख्यिकीय परिवर्तन होते हैं, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, तो वे राष्ट्रीय सुरक्षा संकट उत्पन्न करते हैं।

भाषा संतोष माधव

माधव


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