नयी दिल्ली, 9 मार्च (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को बीजू जनता दल (बीजद) के एक सांसद ने पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन कायम करने को देश के समक्ष एक चुनौती बताते हुए कहा कि विकास के नाम पर यदि नदी, वन और पारिस्थितिकी तंत्र को समाप्त कर दिया जाएगा तो उसका नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ेगा।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भाग लेते हुए बीजद के शुभाशीष खुंटिया ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाना आज देश के समक्ष एक बड़ी चुनौती बन गया है।
उन्होंने ओड़िशा में खारे पानी की एशिया की सबसे बड़ी झील का जिक्र करते हुए कहा कि यह लाखों मछुआरों और स्थानीय लोगों की आजीविका का आधार है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में इस झील में डॉल्फिन की संख्या लगातार बढ़ी है तथा हर वर्ष यहां प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में आते हैं।
खुंटिया ने सरकार से मांग की कि वहां पयर्टन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और पोत परिवहन की दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने ओडिशा सहित देश की नदियों में अवैध रेत खनन को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
बीजद सदस्य ने कहा कि यदि विकास के नाम पर नदी, वन और पारिस्थितिकी तंत्र को समाप्त कर दिया जाएगा तो उसका नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ेगा।
चर्चा में भाग लेते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अयोध्या रामी रेड्डी आला ने कहा कि भारत में परंपरा के अनुसार प्रकृति को भगवान के रूप में माना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के समक्ष एक स्पष्ट लक्ष्य रखा है कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनना है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव जब अपने मंत्रालय के बारे में बोलते हैं तो उन्हें सुनकर लगता है कि यह देश केवल लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी सहित सभी के लिए है।
रेड्डी ने कहा कि देश में पुनर्चक्रीकरण क्षेत्र में लाखों लोग कर रहे हैं और उन्होंने इस क्षेत्र को औपचारिक बनाने के लिए एक प्राधिकरण कायम करने का सुझाव दिया। उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय में जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई सुझाव भी दिये।
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माधव सुभाष
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