बंगाल सरकार के कदम के बाद अपने देश वापस जाने के लिए एकत्रित हो रहे हैं ‘बांग्लादेशी घुसपैठिये’

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बंगाल सरकार के कदम के बाद अपने देश वापस जाने के लिए एकत्रित हो रहे हैं ‘बांग्लादेशी घुसपैठिये’

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 06:04 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 06:04 PM IST

कोलकाता, 26 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में संदिग्ध अवैध घुसपैठियों के लिए जिला स्तर पर निरुद्ध केंद्र शुरू किए जाने के फैसले के बाद कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों के समूह अपने देश लौटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर चौकी पर एकत्रित होते दिख रहे हैं।

यह स्थिति मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा राज्य में ‘‘पहचान करने या पता लगाने, रिकॉर्ड या दस्तावेज से नाम हटाने, देश से बाहर भेजने या निर्वासित करने’’ की नीति को सख्ती से लागू करने की घोषणा किये जाने के बाद सामने आयी है।

हाकिमपुर सीमा चौकी पर मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग सामान, बिस्तर और प्लास्टिक शीट लेकर बैठे दिखाई दिए। इसमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे जो बांग्लादेश जाने की अनुमति का इंतजार करते नजर आए।

अवैध प्रवासियों की इस तरह की ‘‘वापसी’’ पहली बार पिछले साल नवंबर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कवायद के दौरान देखी गई थी और राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद ‘पहचान करने या पता लगाने, रिकॉर्ड या दस्तावेज से नाम हटाने, देश से बाहर भेजने या निर्वासित करने’ का अभियान शुरू करने के बाद फिर से सामने आती प्रतीत होती है।

उत्तर 24 परगना के बसीरहाट उपमंडल स्थित हाकिमपुर में पिछले दो दिनों में 100 से अधिक कथित बांग्लादेशी प्रवासी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जांच चौकी के पास अपने सामान के साथ एकत्रित हुए हैं। इनमें से कई लोग दमदम, न्यू टाउन और डानकुनी जैसे क्षेत्रों में कथित तौर पर वर्षों से मजदूरी और घरेलू काम करते हुए रह रहे थे।

जांच चौकी पर इंतजार कर रहे एक व्यक्ति ने कहा, “अगर सरकार हमें यहां रहने नहीं देगी, तो हमारे पास वापस जाने के अलावा क्या विकल्प है?”

एसआईआर कार्यवाही को लेकर पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में अवैध रूप से रहने वाले निवासियों में दहशत उत्पन्न हो गई थी। उस समय भी, लोग बड़े-बड़े बोरे और बंडल लेकर हकीमपुर में जमा हो गए थे, इस डर से कि जांच में उनके जाली कागजात उजागर हो जाएंगे। कुछ महीने बाद प्रक्रिया धीमी पड़ गई लेकिन अब, सत्ता परिवर्तन के बाद इसने फिर से गति पकड़ ली है।

बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस तरह की वापसी पिछले साल नवंबर में शुरू हुई थी। इस साल की शुरुआत में इनकी संख्या कम हो गई थी, लेकिन पिछले दो दिनों में इसमें काफी वृद्धि हुई है। हम आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं और बांग्लादेश में अपने समकक्षों के संपर्क में हैं।’’

बीएसएफ कर्मियों ने बताया कि कई लोग स्वयं ही अधिकारियों के पास आकर वापसी की प्रक्रिया के लिए मांग कर रहे हैं।

साथ ही, राज्य प्रशासन ने जिलों में ‘निरुद्ध केंद्र’ स्थापित करना शुरू कर दिया है, जहां संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या को सत्यापन और निर्वासन प्रक्रिया पूरी होने तक रखा जाएगा।

मालदा पहला जिला बना है जहां ऐसा केंद्र शुरू किया गया है, जहां नौ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है।

भाषा अमित माधव

माधव