Bharat Bandh 2026: कुछ बड़ा होने वाला है..! भारत अमेरिका ट्रेड डील के बाद संयुक्त किसान मोर्चा का विस्फोटक ऐलान, सरकार पर लगाए ये गंभीर आरोप, इस पार्टी का खुला समर्थन भी मिला

Bharat Bandh 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत पर टैरिफ कम कर दिया है। ताते चलें कि भारत पर  50% अमेरिकी टैरिफ बीते 27 अगस्त से लागू है। वहीं अब, संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद का आह्वान किया है। 

Bharat Bandh 2026: कुछ बड़ा होने वाला है..! भारत अमेरिका ट्रेड डील के बाद संयुक्त किसान मोर्चा का विस्फोटक ऐलान, सरकार पर लगाए ये गंभीर आरोप, इस पार्टी का खुला समर्थन भी मिला

trade deal/ image source: MichaelKugelman x handle

Modified Date: February 12, 2026 / 07:18 am IST
Published Date: February 12, 2026 7:04 am IST
HIGHLIGHTS
  • संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद का किया आह्वान
  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील से नुकसान का किया दावा
  • बंद को आम आदमी पार्टी ने समर्थन देने का किया ऐलान

दिल्ली: हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील को दो नजरिए से देखा जा रहा है। एक तरफ इस डील को फायदे का सौदा बताया जा रहा है वहीं दूसरी ओर ट्रेड डील को किसानों के साथ अन्याय भी बताया जा रहा है।  दरअसल, US India Trade Deal अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत पर टैरिफ कम कर दिया है। भारत पर लगाए जाने वाले 25% टैरिफ को घटाकर 18% किया। अब भारत और अमेरिका के बीच केवल 18 फीसदी टैरिफ है। इस बात का ऐलान खुद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर दी है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसपर खुशई जताई है। बताते चलें कि भारत पर  50% अमेरिकी टैरिफ बीते 27 अगस्त से लागू है। वहीं अब, संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद का आह्वान किया है।

India US Trade Deal: संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद का किया आह्वान

दरअसल, संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद का आह्वान करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील से देश के किसानों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर किसान संगठनों ने देशभर के किसानों से बंद को सफल बनाने की अपील की है।

बंद को आम आदमी पार्टी ने समर्थन देने का किया ऐलान

इस बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी भारत बंद को समर्थन देने का ऐलान किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसानों की आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और सरकार को तुरंत सभी पक्षों के साथ खुली चर्चा करनी चाहिए। AAP ने केंद्र से अपील की है कि वह ट्रेड डील से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करे और संसद में इस पर विस्तृत बहस कराए। पार्टी का दावा है कि यदि समझौते से देश के कृषि क्षेत्र को नुकसान होता है तो इसका असर व्यापक स्तर पर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

बता दें कि, किसान नेता राकेश टिकैत ने भी ट्रेड डील पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को “अंधेरे में रखा” है। उनके अनुसार, यदि ट्रेड डील में कृषि क्षेत्र से जुड़े ऐसे प्रावधान शामिल हैं जो आयात को बढ़ावा देते हैं, तो इससे भारतीय किसानों की आय पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

लोकसभा में भी ट्रेड डी को लेकर हुई चर्चा

लोकसभा में बुधवार को बजट पर चर्चा हुई। पक्ष और विपक्ष के बीच तीखीं नोकझोंक हुई। इस दौरान AIMIM चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने 6 फरवरी को जो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया है, उसमें सीधे सेक्शन 4 का जिक्र है, जिसमें कहा गया है कि अगर हम रूस से कुछ भी खरीदते हैं तो 25 परसेंट टैरिफ लगाया जाएगा। वह ‘गोरी चमड़ी वाला’ कौन होता है जो हमें बताए कि हम किससे तेल खरीद सकते हैं? हमें आजादी इसलिए मिली ताकि हम खुद तय कर सकें कि किससे तेल खरीदना है। वे कौन होते हैं हमें बताने वाले? क्या वे हमारे माता-पिता हैं जो वे हम पर 25 परसेंट टैरिफ लगा सकते हैं? उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन इंसाफ होना चाहिए, और हाफिज सईद, मसूद अजहर, और लखवी (जकी-उर-रहमान) को भारत लाया जाना चाहिए।

Owaisi On Ind US Trade Deal: उन्होंने सरकार पर मुसलमानों से नफरत करने का आरोप लगाया है। ओवैसी ने कहा कि सरकार विकसित भारत बनाने की बात करती है। लेकिन मैं बताना चाहता हूं, विकसित भारत तभी बन पाएगा, जब मुसलमान शैक्षणिक और अन्य मामलों में ताकतवर होगा। AIMIM सांसद ओवैसी ने हायर एजूकेशन देने वाले संस्थानों में मुस्लिम बच्चों के रजिस्ट्रेशन में आई कमी को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ साल में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों में मुस्लिम बच्चों को लेकर बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ये सब अचानक नहीं हो रहा है। मुसलमान बच्चों के पढ़ाई छोड़ने की दर भी अधिक है। उन्होंने कहा कि ये सब सरकार की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस सरकार में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने पांच साल से अल्पसंख्यकों के लिए तीन छात्रवृत्ति योजनाओं को मंजूरी नहीं दी है।

अल्पसंख्यक मामलों के लिए 10 हजार करोड़ की मांग

ओवैसी ने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए हो रही है क्योंकि मोदी सरकार मुसलमानों से नफरत करती है। उन्होंने कहा कि यह सरकार 2047 तक विकसित भारत बनाने की बात करती है और बजट में इस बारे में बारे में बताया भी गया। बड़े-बड़े दावे भी किए गए हैं। लेकिन बिना मुसलमानों के ये संभव नहीं है। ओवैसी ने बजट में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए आवंटन बढ़ाकर 10 हजार करोड़ रुपये करने की मांग की है।

 


लेखक के बारे में

पत्रकारिता और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक हूँ। मीडिया क्षेत्र में 3 वर्षों का विविध अनुभव प्राप्त है, जहां मैंने अलग-अलग मीडिया हाउस में एंकरिंग, वॉइस ओवर और कंटेन्ट राइटिंग जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। IBC24 में मैं अभी Trainee-Digital Marketing के रूप में कार्यरत हूँ।