नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) दोनों ने सोमवार को आबकारी नीति मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को अपने-अपने पक्ष में बताते हुए एक-दूसरे पर निशाना साधा।
भाजपा ने उच्च न्यायालय के निर्देशों का स्वागत करते हुए कहा कि यह आप की संक्षिप्त खुशी का अंत है।
हालांकि, ‘आप’ ने दावा किया कि अदालत ने केवल सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई पर अस्थायी रूप से रोक लगाई है, न कि पार्टी नेताओं के आरोपमुक्त होने होने पर।
उच्च न्यायालय ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर की गई याचिका पर सोमवार को जवाब मांगा। याचिका में उन्हें दोषमुक्त करार देने के निचली आदेश को चुनौती दी गई है।
उच्च न्यायालय ने यह संकेत भी दिया कि वह सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ निचली अदालत की ‘‘पूर्वाग्रहपूर्ण’’ टिप्पणियों पर रोक लगाएगा।
भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीबीआई की याचिका को स्वीकार करने के उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया।
उन्होंने कहा, ‘‘निचली अदालत द्वारा केजरीवाल को आरोपमुक्त किया जाना कोई असामान्य घटनाक्रम नहीं है। अतीत में कई घोटालों में आरोपी नेताओं जैसे लालू प्रसाद यादव, ए राजा और कनिमोझी को निचली अदालतों ने आरोपमुक्त किया था और उन्होंने संक्षिप्त खुशी मनाई थी, लेकिन बाद में उनमें से कई को सख्त सजा मिली।”
सीबीआई की एक अदालत ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त करार दिया था। अदालत ने सीबीआई की भी कड़ी निंदा करते हुए कहा था कि उसका मामला न्यायिक समीक्षा में पूरी तरह विफल रहा है।
भाजपा पर पलटवार करते हुए ‘आप’ ने यह दावा किया कि उच्च न्यायालय ने केवल सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाई है और पार्टी के नेताओं के आरोपमुक्त किए जाने का राउज एवेन्यू अदालत का निर्णय जस का तस है।
आप की दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने सभी आरोपियों को आरोपमुक्त करने के निचली अदालत के फैसले पर किसी रोक का आदेश नहीं दिया। वह आदेश अब भी जस का तस कायम है।”
भाषा जोहेब नेत्रपाल
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