भाजपा ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर राहुल गांधी की टिप्पणियों की आलोचना की

भाजपा ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर राहुल गांधी की टिप्पणियों की आलोचना की

भाजपा ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर राहुल गांधी की टिप्पणियों की आलोचना की
Modified Date: March 19, 2026 / 08:03 pm IST
Published Date: March 19, 2026 8:03 pm IST

नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष पर की गई टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए इन्हें ‘‘प्रतिक्रियात्मक और राजनीतिक रूप से प्रेरित’’ बताया।

भाजपा ने सुझाव दिया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी को अपने वरिष्ठ सहयोगियों से सीखना चाहिए, जिन्होंने पश्चिम एशिया में भारत की विदेश नीति के प्रति अधिक संतुलित रुख अपनाया है।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने गांधी की ‘‘भारत विरोधी राजनीति’’ को बेनकाब किया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कांग्रेस नेताओं ने गांधी को बेनकाब किया! कांग्रेस नेताओं का कहना है- ‘भारत सही कर रहा है; पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत का रुख बिल्कुल सही है।’ राहुल गांधी की कथित भारत-विरोधी राजनीति की पोल उनके ही लोगों ने खोल दी।’’

उन्होंने कहा कि गांधी ने वैश्विक संघर्ष के दौरान देश के खिलाफ खड़े होने का विकल्प चुना।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, ‘‘खास बात यह है कि शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर अधिक संतुलित और जिम्मेदार रुख अपनाया है, जिसमें रणनीतिक स्वायत्तता और राजनयिक संतुलन के महत्व को रेखांकित किया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके विपरीत, गांधी की टिप्पणियां प्रतिक्रियात्मक और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होती हैं, जो वैश्विक भू-राजनीति की जटिलताओं को नजरअंदाज करती हैं। एक संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय संकट को घरेलू राजनीतिक आलोचना तक सीमित कर देना, भारत की विदेश नीति के रुख में असंगति का संकेत दे सकता है।’’

भाटिया ने कहा कि एक परिपक्व विदेश नीति के लिए संयम, दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की स्पष्टता और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं की समझ की आवश्यकता होती है।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘गांधी को अपनी ही पार्टी के भीतर से सीख लेनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि एक परिपक्व विदेश नीति के लिए त्वरित राजनीतिक लाभ उठाने के बजाय संयम, दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित की स्पष्टता और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं की समझ की आवश्यकता होती है।’’

भाटिया ने राजनीतिक फायदे के लिए संघर्ष में किसी का पक्ष न लेने के लिए सरकार को निशाना बनाने के लिए कांग्रेस की आलोचना की।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अक्सर राजनीतिक फायदे के लिए राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध कार्य करते देखा गया है और ऐसा लगता है कि वह ईरान-इजराइल/अमेरिका संघर्ष में भी यही कर रही है। पार्टी भारत की संतुलित और रणनीतिक विदेश नीति के बावजूद सरकार द्वारा किसी का पक्ष न लेने के लिए आलोचना करती रही है।

भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी गांधी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि थरूर और तिवारी खुद इस मुद्दे पर गांधी के रुख का खंडन कर रहे हैं।

एक अखबार में थरूर द्वारा लिखे गए एक लेख का हवाला देते हुए, तीनों प्रवक्ताओं ने कहा कि थरूर ने सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन किया है, और उन्होंने लिखा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की चुप्पी ‘‘नैतिक आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदार कूटनीतिक नेतृत्व है।’’

पूनावाला ने विदेश नीति को लेकर गांधी के दृष्टिकोण पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राहुल गांधी विदेश नीति से ऊपर राजनीति को क्यों रखते हैं? लेकिन अब कांग्रेस नेताओं ने उन्हें आईना दिखा दिया है! ठीक वैसे ही जैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हुआ था।’’

थरूर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये साक्षात्कार में बृहस्पतिवार को कहा कि वह अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष पर भारत सरकार के सतर्कतापूर्ण रुख अपनाने की इच्छा को समझते हैं, और उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार दोनों पक्षों से युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने की सार्वजनिक अपील कर सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु पर तुरंत सार्वजनिक संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी, और वैसा ही कदम उठाना चाहिए था जैसा उसने 2024 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के निधन के बाद उठाया था।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश


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