कलकत्ता उच्च न्यायालय ने विवाह का झूठा वादा कर बलात्कार मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा

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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने विवाह का झूठा वादा कर बलात्कार मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा

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  • Publish Date - February 8, 2026 / 04:07 PM IST,
    Updated On - February 8, 2026 / 04:07 PM IST

कोलकाता, आठ फरवरी (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने विवाह का झूठा वादा कर बलात्कार के मामले में दोषी एक व्यक्ति की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि इसे सहमति नहीं माना जा सकता तथा उसे अपने गलत कामों के परिणामों का सामना करना होगा।

इस संबंध में एक जनवरी 2006 को दर्ज मामले पर मुर्शिदाबाद जिले की कंडी सत्र अदालत ने 2014 में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत बलात्कार के आरोपी को दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘आरोपी का इरादा शुरू से ही ठीक नहीं था, और लड़की आरोपी के इरादे को भांप नहीं सकी, क्योंकि आरोपी ने उसे संतान के बदले शादी का वादा करके उसे पूरी तरह से गुमराह कर दिया था।’’

बड़वान थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, शादीशुदा आरोपी ने शिकायतकर्ता से शादी करने से इनकार कर दिया जबकि पीड़िता उसके बच्चे की मां बनने वाली थी।

हाल ही में एक फैसले में न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी ने दोषी व्यक्ति की अपील को यह मानते हुए खारिज कर दिया कि इसमें कोई दम नहीं है।

न्यायमूर्ति चटर्जी ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता को शुरू से ही दुर्भावनापूर्ण इरादे से युवती के साथ किए गए जघन्य अपराध के लिए अपने गलत कामों के परिणामों का सामना करना होगा।’’

भाषा शफीक नेत्रपाल

नेत्रपाल