देहरादून, 21 मई (भाषा) उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पैनेसिया अस्पताल में हुए अग्निकांड में एक महिला मरीज की मौत के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, मृतका वीरवती देवी के बेटे सन्नी पाल की तहरीर पर नेहरू कॉलोनी थाने में पैनेसिया अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही से मौत होने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हरिद्वार रोड स्थित इस निजी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में बुधवार को एयर कंडीशनर में विस्फोट के बाद आग लग गई थी। हादसे में वीरवती देवी की मौत हो गई थी, जबकि 10 अन्य मरीज घायल हो गए थे।
भीषण गर्मी, गैस और धुएं के बीच चलाए गए बचाव अभियान के दौरान तीन पुलिसकर्मियों की भी तबीयत बिगड़ गई थी, जिन्हें बाद में दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जीएमएस रोड स्थित कांवली गांव निवासी सन्नी पाल ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनकी मां को चक्कर आने के बाद गिरने पर 19 मई की सुबह करीब छह बजे पैनेसिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, क्योंकि अन्य अस्पतालों में बिस्तर उपलब्ध नहीं थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल ने करीब 10 घंटे के इलाज के दौरान जांच और दवाइयों के नाम पर लगभग 50 हजार रुपये का बिल वसूला।
पाल के अनुसार, 20 मई की सुबह करीब नौ बजे उनके बड़े भाई कमल ने फोन पर बताया कि अस्पताल के आईसीयू में आग लग गई है। कुछ देर बाद उन्हें सूचना मिली कि उनकी मां गंभीर रूप से झुलस गई हैं और एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाए जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी थी, जिसके कारण उनकी मां की मौत हुई।
पाल ने यह भी आरोप लगाया कि एंबुलेंसकर्मी तथा अन्य बड़े और सरकारी अस्पतालों में सक्रिय कुछ कथित दलाल मरीजों को पैनेसिया अस्पताल ले जाने की सलाह देते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना के बाद उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून के मुख्य चिकित्साधिकारी को सभी निजी अस्पतालों की जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां सुरक्षा और अन्य मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
स्वास्थ्य मंत्री ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश दिए हैं।
भाषा
दीप्ति रवि कांत