‘यास’ से निपटने के लिए केंद्र ने बंगाल को कम सहायता राशि दी: बनर्जी

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‘यास’ से निपटने के लिए केंद्र ने बंगाल को कम सहायता राशि दी: बनर्जी

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  • Publish Date - May 24, 2021 / 01:26 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:09 PM IST

कोलकाता, 24 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि ‘यास’ चक्रवात से मुकाबले के लिए केंद्र सरकार ने अग्रिम सहायता राशि के तौर पर केवल 400 करोड़ रुपये को मंजूरी दी है जबकि पश्चिम बंगाल की तुलना में कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों जैसे कि ओडिशा और आंध्र प्रदेश को 600 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों तथा अंडमान निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल की बैठक के बाद बनर्जी ने कहा कि उनके राज्य में जनसंख्या घनत्व अधिक है और बंगाल के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है।

राज्य सचिवालय में बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, “आज सुबह अमित शाह जी के साथ बैठक हुई। यास चक्रवात से मुकाबले के लिए केंद्र की ओर से ओडिशा और आंध्र प्रदेश को 600 करोड़ रुपये से अधिक दिया जा रहा है और बंगाल को केवल 400 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। यह अग्रिम राशि है जो राज्यों को मिलने वाली है।”

उन्होंने कहा, “बैठक में मैंने जानना चाहा कि जनसंख्या घनत्व और जिलों के मामले में ओडिशा तथा आंध्र से बड़े राज्य बंगाल को कम पैसा क्यों दिया जा रहा है? हमें लगातार वंचित क्यों रखा जा रहा है?” बनर्जी ने कहा कि शाह ने पूरा सहयोग देने का वादा किया था लेकिन जब राज्यों को अग्रिम राशि देने की घोषणा करने की बात आई तब बंगाल को कम दिया गया।

उन्होंने कहा, “ओडिशा और आंध्र प्रदेश से मेरे अच्छे संबंध हैं। केंद्र उन्हें क्या दे रहा है इससे मुझे कोई समस्या नहीं। लेकिन क्या आप उत्तर प्रदेश की तुलना पुडुचेरी से कर सकते हैं? यह जनसंख्या घनत्व, इतिहास, भूगोल और सीमाओं पर निर्भर करता है।”

बनर्जी ने शाह की आलोचना करते हुए कहा, “गृह मंत्री ने मुझे बताया कि इस मसले पर बाद में चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। मैंने इस पर कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि मुझे राजनीति विज्ञान की समझ है लेकिन इस विषय की नहीं।”

बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इससे पहले 2019 में बुलबुल और उसके बाद अम्फान चक्रवात के समय भी पश्चिम बंगाल की सहायता नहीं की थी।

भाषा यश नरेश

नरेश