पंजीकरण के निलंबन को चुनौती देने वाली सीएचआरआई की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

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पंजीकरण के निलंबन को चुनौती देने वाली सीएचआरआई की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

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  • Publish Date - July 19, 2021 / 01:32 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:43 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) की उस याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा, जिसमें उसने विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन के लिए 180 दिनों के लिए उसका पंजीकरण निलंबित किये जाने को चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र को नोटिस जारी कर उसे जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने केंद्र के वकील को सीएचआरआई को विदेशी वित्तपोषण के रूप में प्राप्त राशि में से 25 प्रतिशत का उपयोग करने की अनुमति के बारे में निर्देश प्राप्त करने के लिए भी समय दिया, जब तक कि इसके पंजीकरण का निलंबन रद्द नहीं हो जाता।

अदालत ने इस मामले को 26 जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत ने केंद्र सरकार के वकील को इस बारे में निर्देश लेने के लिए कहा कि क्या वह भविष्य में सीएचआरआई को विदेशी वित्तपोषण प्राप्त करने की अनुमति देगा, बशर्ते कि वह प्राधिकारियों या अदालत की अनुमति के बिना उनका उपयोग न करे।

सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार के स्थायी वकील अनिल सोनी ने कहा कि नियमों के अनुसार, निलंबन आदेश को रद्द करने की मांग करने वाले एनजीओ को जवाब देने के लिए उनके पास 180 दिनों का समय है और उन्होंने जांच शुरू कर दी है जिसे समाप्त होने में कुछ समय लगेगा।

न्यायाधीश ने, हालांकि, कहा कि उन्हें दलील में दम नहीं दिखता है और कहा, ‘‘मैं आपको 180 दिनों का यह अंतहीन समय नहीं देने जा रही हूं।’’

सीएचआरआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि निलंबन आदेश अधिनियम के तहत निर्धारित योजना के ढांचे के विपरीत है और यहां तक ​​कि निलंबन बिना कोई जांच शुरू किए पारित कर दिया गया और यह रद्द किये जाने योग्य है।

उन्होंने कहा कि सीएचआरआई के पंजीकरण का निलंबन एफसीआरए के कथित उल्लंघनों के अनुरूप नहीं है।

उच्च न्यायालय ने इससे पहले संगठन को वेतन के भुगतान और अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए उसे उसके मौजूदा धन का उपयोग करने की अनुमति देने पर केंद्र का रुख मांगा था।

भाषा अमित अनूप

अनूप