विधि अध्ययन पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए विशेषज्ञों का पैनल गठित करे केंद्र: न्यायालय

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विधि अध्ययन पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए विशेषज्ञों का पैनल गठित करे केंद्र: न्यायालय

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  • Publish Date - March 11, 2026 / 03:06 PM IST,
    Updated On - March 11, 2026 / 03:06 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पाठ्यपुस्तकों में विधि अध्ययन से संबंधित पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए विषय विशेषज्ञों का एक पैनल एक सप्ताह के भीतर गठित करने का बुधवार को निर्देश दिया।

न्यायालय ने कहा कि इस मामले में उसके आदेशों का उद्देश्य न्यायपालिका के संस्थागत कामकाज की किसी उचित एवं तथ्यपरक आलोचना को रोकना नहीं है।

शीर्ष अदालत ने ‘‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर आपत्तिजनक’’ सामग्री वाली एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस अध्याय का मसौदा प्रोफेसर मिशेल दानिनो की अध्यक्षता वाली पाठ्यपुस्तक विकास टीम ने तैयार किया था।

न्यायालय ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे विवादास्पद अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले तीन विशेषज्ञों से तत्काल खुद को अलग करें। पाठ्यपुस्तक विकास टीम के अध्यक्ष दानिनो थे और सुपर्णा दिवाकर एवं आलोक प्रसन्न कुमार उसके सदस्य थे।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी इस पीठ में शामिल थे।

पीठ ने कहा कि अध्याय का मसौदा तैयार करने वाले ये तीन विशेषज्ञ आदेश में संशोधन के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

उसने कहा कि विधि अध्ययन से संबंधित पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए गठित विशेषज्ञों के पैनल में एक पूर्व न्यायाधीश, एक शिक्षाविद और कानून के क्षेत्र का ख्यातिप्राप्त पेशेवर शामिल होगा। पीठ ने केंद्र से यह भी कहा कि वह विधि अध्ययन से संबंधित पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने में राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल को भी शामिल करे।

केंद्र ने सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया कि उसने एनसीईआरटी को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि अगर केंद्र ने एनसीईआरटी से ऐसा करने के लिए कहने के बजाय, पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया होता तो बेहतर होता।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने एनसीईआरटी से केवल आठवीं कक्षा ही नहीं बल्कि सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने के लिए कहा है। उन्होंने पीठ को आश्वासन दिया कि पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया जाएगा।

उन्होंने पीठ से कहा, ‘‘हमने व्यवस्थागत बदलाव शुरू कर दिए हैं।’’

उन्होंने साथ ही कहा कि विषय विशेषज्ञों की जांच-परख के बिना कुछ भी प्रकाशित नहीं किया जाएगा।

मेहता ने पीठ से यह भी कहा कि एनसीईआरटी के निदेशक ने बिना शर्त माफी मांगते हुए एक हलफनामा दायर किया है।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के भविष्य में किसी भी प्रकाशन, पुनर्मुद्रण या डिजिटल प्रसार पर 26 फरवरी को ‘‘पूर्ण प्रतिबंध’’ लगा दिया था। भाषा सिम्मी रंजन

रंजन