मानव संसाधन ‘घोटाले’ में आरोपी कारोबारी की जमानत याचिका पर छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस

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मानव संसाधन ‘घोटाले’ में आरोपी कारोबारी की जमानत याचिका पर छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 02:00 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 02:00 PM IST

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) में भर्ती में कथित भ्रष्टाचार और अवैध कमीशन रैकेट के मामले में आरोपी व्यवसायी अनवर ढेबर की जमानत याचिका पर छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब मांगा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन जून तक जवाब मांगा है।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 13 मई को ढेबर की जमानत याचिका यह कहकर खारिज कर दी थी कि आरोपों से राज्य द्वारा संचालित निगम के भीतर ‘‘गहराई तक जड़ जमाए और व्यवस्थित भ्रष्टाचार नेटवर्क’’ का संकेत मिलता है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि सार्वजनिक धन से जुड़े आर्थिक अपराधों को अधिक गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि गहन साजिशों और सार्वजनिक धन की बड़े पैमाने पर हानि से जुड़े आर्थिक अपराध गंभीर अपराध होते हैं जो देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं।

जांच में यह पाया गया कि प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों को अपने वैध बिल और बकाया राशि के निपटान के लिए अवैध कमीशन देने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

आर्थिक अपराध शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सीएसएमसीएल के भीतर एक सुनियोजित तंत्र संचालित हो रहा था जिसके तहत मानव संसाधन एजेंसियों को बिल के निपटान के लिए कमीशन देने के लिए मजबूर किया जाता था और यह रकम कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से भेजी जाती थी।

भाषा सुरभि मनीषा वैभव

वैभव