जलवायु वित्त सबसे जरूरतमंदर देशों तक पहुंचना चाहिए: संरा जलवायु प्रमुख

जलवायु वित्त सबसे जरूरतमंदर देशों तक पहुंचना चाहिए: संरा जलवायु प्रमुख

जलवायु वित्त सबसे जरूरतमंदर देशों तक पहुंचना चाहिए: संरा जलवायु प्रमुख
Modified Date: July 22, 2026 / 10:03 am IST
Published Date: July 22, 2026 10:03 am IST

(अपर्णा बोस)

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रुपरेखा समझौते (यूएनएफसीसीसी) से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि जलवायु वित्त (जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कोष) बढ़ तो रहा है लेकिन पर्याप्त तेजी से नहीं और यह बेहद जरूरी है कि अधिक वित्तीय सहायता उन देशों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है और जिनकी इस संकट को पैदा करने में सबसे कम भूमिका रही है।

यूएनएफसीसीसी के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी31) से पहले जलवायु वित्त एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि विकसित देशों को अनुकूलन वित्त में तीन गुना वृद्धि करनी चाहिए और 2035 तक हर साल 300 अरब अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी करनी चाहिए।

स्टील ने कहा, ‘‘जलवायु वित्त अब भी बढ़ रहा है, लेकिन पर्याप्त तेजी से नहीं। यह बेहद जरूरी है कि अधिक वित्तीय सहायता उन देशों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है और जिनकी इस संकट को पैदा करने में सबसे कम भूमिका रही है। सभी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह निभाया जाना चाहिए। विकसित देशों को अनुकूलन वित्त को तीन गुना करना होगा और 2035 तक हर साल 300 अरब अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी करनी होगी। यह उस स्पष्ट रूपरेखा का हिस्सा है, जिसके तहत वार्षिक जलवायु वित्त को 1,300 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाया जाना है।’’

जून में जर्मनी के बॉन में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की मध्यवधि जलवायु बैठकों (जिन्हें औपचारिक रूप से यूएनएफसीसीसी के तहत सहायक निकायों का 64वां सत्र कहा जाता है) के दौरान भारत ने जलवायु वित्त में कमी को लेकर चिंता जताई थी। भारत ने विशेष रूप से जलवायु वित्त के कोष की पुनः पूर्ति और सहायता में गिरावट के साथ-साथ अनुकूलन वित्त की बढ़ती कमी पर चिंता व्यक्त की थी।

स्टील ने कहा कि सीओपी31 को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जलवायु प्रौद्योगिकी के विकास और उसके हस्तांतरण में तेजी लाना जरूरी है।

यूएनएफसीसीसी के अधिकारी ने कहा, ‘‘जलवायु प्रौद्योगिकी केंद्र के नए मेजबान के साथ व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना और बेलेम प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन कार्यक्रम के सामूहिक क्रियान्वयन को प्रदर्शित करना, ऐसे महत्वपूर्ण कदम हैं जो आगे बढ़ने में मदद करेंगे।’’

स्टील ने सोमवार को दिल्ली में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ हुई बैठक के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इसमें अंतरराष्ट्रीय जलवायु सहयोग, वैश्विक जलवायु संकट और नागरिकों एवं अर्थव्यवस्था पर जलवायु संबंधी कदमों के फायदों पर चर्चा हुई।

स्टील ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने अंतरराष्ट्रीय जलवायु सहयोग और वैश्विक जलवायु संकट से निपटने में भारत की गहरी प्रतिबद्धता और नेतृत्व के बारे में बात की। साथ ही, जलवायु संबंधी कदमों से भारतीय लोगों और अर्थव्यवस्था को होने वाले बड़े फायदों पर भी चर्चा की। इसमें भारत की ‘सौर महाशक्ति’ वाली स्थिति को और आगे बढ़ाने पर बात हुई जो पहले से ही आर्थिक विकास, रोजगार और जीवन स्तर में सुधार को बढ़ावा दे रही है।’’

भाषा सुरभि सिम्मी

सिम्मी


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