कोयला घोटाला: एसकेएस इस्पात, पूर्व केंद्रीय मंत्री के भाई और तीन अन्य आरोपी बरी

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कोयला घोटाला: एसकेएस इस्पात, पूर्व केंद्रीय मंत्री के भाई और तीन अन्य आरोपी बरी

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 05:30 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 05:30 PM IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने छत्तीसगढ़ के विजय सेंट्रल कोयला ब्लॉक के आवंटन में हुईं कथित अनियमितताओं से संबंधित मामले में एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय के भाई समेत चार अन्य लोगों को बरी कर दिया।

विशेष न्यायाधीश सुनेना शर्मा ने मैसर्स एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड, इसके निदेशक अनिल गुप्ता, संयुक्त प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता, प्रबंधक अमृत सिंह और नामित निदेशक सुधीर कुमार सहाय को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों से यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा।

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि कंपनी और आरोपी व्यक्तियों ने कोयला ब्लॉक आवंटन हासिल करने के लिए गलत जानकारी दी और कुछ बातें छिपाईं। सीबीआई के मुताबिक उन्होंने ऐसे झूठे दावे किए और आंकड़े दिखाए, जिससे लगे कि वे काम शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने मिलकर साजिश रची और कोयला मंत्रालय को धोखा देकर एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड के पक्ष में कोयला ब्लॉक आवंटित करवाया। इसके लिए उन्होंने कंपनी की संपत्ति, जमीन, निवेश और जरूरी मंजूरियों के बारे में गलत जानकारी दी।

अदालत ने 23 मई को सुनाए गए 271 पन्नों के फैसले में कहा, “पेश किए गए साक्ष्य इतने ठोस नहीं हैं कि यह साबित किया जा सके कि आरोपियों ने धोखा देने, बहकाने, बेईमानी करने या गलत फायदा उठाने जैसा कोई काम किया था। इसलिए भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला साबित नहीं होता।’’

अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोपों को “संदेह से परे” साबित करने में विफल रहा।

सीबीआई ने कथित कोयला घोटाले से जुड़े 50 से अधिक मामले दर्ज किए थे। एजेंसी द्वारा दायर भ्रष्टाचार के 25 से ज्यादा मामले अभी भी इस कथित घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्थापित दो विशेष अदालतों में लंबित हैं जबकि 27 मामलों का निपटारा हो चुका है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 जनवरी 2025 को उच्चतम न्यायालय को बताया था कि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 45 शिकायतें (पूरक शिकायतों समेत) अभी लंबित हैं।

उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2014 में, 1993 से 2010 के बीच केंद्र सरकार द्वारा किया गया 214 कोयला ब्लॉक का आवंटन रद्द कर दिया था। यह निर्णय दो जनहित याचिकाओं पर विचार करने के बाद लिया गया था। इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष सीबीआई न्यायाधीश द्वारा मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया था।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश