अमृतसर में किसानों के प्रदर्शन की वजह से यात्रियों को हुई परेशानी

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अमृतसर में किसानों के प्रदर्शन की वजह से यात्रियों को हुई परेशानी

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  • Publish Date - November 17, 2022 / 10:21 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:00 PM IST

अमृतसर, 17 नवंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई ज़मीन के वास्ते अधिक मुआवाज़े की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को किसानों ने यहां एक अहम सड़क जाम कर दी। इस वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

भारती किसान यूनियन (सिद्धूपुर) की अगुवाई में प्रदर्शनकारी किसानों ने कत्थूनंगल टॉल प्लाजा को अवरुद्ध कर दिया। इस वजह से अमृतसर-पठानकोट राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ जिससे जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जाने वाले लोगों को परेशानी हुई।

किसानों ने अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली टोल प्लाजा की ओर जाने वाली सड़क पर खड़ी कर दी थी।

चविंडा देवी गांव के पास दोपहर के समय नाकेबंदी के कारण लंबा जाम लग गया।

हालांकि, शाम को हालात कुछ बेहतर हुए क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने टोल प्लाजा की दो लेन खोल दी, जिससे टोल टैक्स का भुगतान किए बिना वाहनों को गुजरने दिया गया।

किसानों ने बुधवार को यहां भंडारी पुल को जाम कर दिया था। यात्रियों की आलोचना का सामना करने के बाद, उन्होंने अपनी नाकेबंदी खत्म कर दी थी और अपना प्रदर्शन कत्थूनंगल टोल प्लाजा पर स्थानांतरित कर दिया।

शुरुआत में बुधवार शाम को प्रदर्शन खत्म होना था लेकिन बाद में किसानों ने नाकेबंदी को खत्म करने से इनकार कर दिया।

किसान राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित अपनी भूमि के लिए अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसी के साथ वे खराब मौसम और कीटों के हमले के कारण फसल क्षति के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं। उनकी यह भी मांग है कि अब निरस्त किए जा चुके कृषि कानूनों के खिलाफ चले आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द किया जाए।

किसानों ने पटियाला में पटियाला-चंडीगढ़ रोड पर धरेरी जट्टान टोल प्लाजा को भी जाम कर दिया और फरीदकोट, मानसा और तलवंडी साबो में प्रदर्शन किया।

इस बीच, किसान मजदूर संघर्ष समिति ने कहा कि वह 26 नवंबर को उपायुक्तों के कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगी।

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि वे मांग कर रहे हैं कि किसानों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की जाए और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए।

भाषा

नोमान मनीषा

मनीषा